रांची: झारखंड पुलिस मुख्यालय में न्याय प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक हुई। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव निष्ठा तिवारी और झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य केंद्र नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहा।

बैठक में सबसे ज्यादा जोर ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के उपयोग पर दिया गया। डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए इस ऐप को गेम-चेंजर माना जा रहा है। संयुक्त सचिव ने ऐप के संचालन में आने वाली तकनीकी चुनौतियों और उनके समाधानों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

समय सीमा और वैज्ञानिक जांच पर जोर

अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए कि नए कानूनों के तहत अब मामलों की जांच एक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी। जांच की गुणवत्ता सुधारने के लिए अब केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर न रहकर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद लेना अनिवार्य होगा, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर न्याय की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। इस बैठक में आईजी स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने राज्य में इन कानूनों को जमीनी स्तर पर उतारने की रणनीति साझा की।

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