Chaibasa News: विश्वविद्यालय में उपाधि प्रमाण पत्र वितरण को लेकर अचानक माहौल गर्म हो गया है। छात्र मोर्चा के जिलाध्यक्ष सनातन पिंगुवा ने प्रशासन पर भेदभाव और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न सिर्फ छात्रों के साथ अन्याय है बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

टॉपर को सम्मान, बाकी छात्रों को महीनों इंतज़ार

पिंगुवा के मुताबिक टॉपर छात्रों को दीक्षांत समारोह में सम्मान के साथ प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं, जबकि सामान्य छात्रों को हफ्तों–महीनों की देरी झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि “प्रमाण पत्र हर छात्र का अधिकार है, इसे श्रेणी के आधार पर बांटना शर्मनाक है।”

छात्र नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन दीक्षांत समारोह की तैयारी में व्यस्त है, लेकिन बुनियादी कामों—जैसे परिणाम वितरण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और छात्र सुविधाओं—को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर रहा है।

‘राज्यपाल के सामने हकीकत छुपाने में जुटा प्रशासन’

सनातन पिंगुवा ने कहा कि दीक्षांत समारोह के नाम पर चमक-दमक दिखाई जा रही है ताकि राज्यपाल के सामने विश्वविद्यालय की वास्तविक समस्याओं पर पर्दा डाला जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन “दिखावे की नीति” छोड़कर छात्रों की असली जरूरतों पर ध्यान दे।

छात्र मोर्चा ने रखीं चार मांगें

छात्र मोर्चा ने प्रशासन के सामने चार अहम मांगें रखी हैं—

  1. हर छात्र को समय पर और बिना भेदभाव के उपाधि प्रमाण पत्र मिले।

  2. दीक्षांत समारोह छात्र-केंद्रित हो, न कि प्रशासन-केंद्रित।

  3. प्रमाण पत्र वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए।

  4. छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता देकर सुनवाई और समाधान हो।

शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी

पिंगुवा ने साफ चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द सुधार नहीं करता, तो छात्र मोर्चा बड़े स्तर पर शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगा। छात्रों में इस मुद्दे को लेकर गहरा रोष देखा जा रहा है।

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