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जमीन विवाद और रंगदारी से शुरू हुआ संघर्ष, पहुंचा हत्या तक – पढ़ें पूरी कहानी

Ranchi : राजधानी रांची के रातु थाना क्षेत्र में 7 सितंबर को हुए सनसनीखेज गोलीकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। घटना के पीछे की कहानी न सिर्फ अपराध जगत की गहरी साजिश को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस

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Ranchi : राजधानी रांची के रातु थाना क्षेत्र में 7 सितंबर को हुए सनसनीखेज गोलीकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। घटना के पीछे की कहानी न सिर्फ अपराध जगत की गहरी साजिश को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस तरह जमीन विवाद और रंगदारी की लड़ाई ने एक और जान ले ली। पुलिस को मिली सूचना के अनुसार, रातु थाना क्षेत्र के ग्राम झखराटांड में अज्ञात अपराधियों ने प्रदीप लोहरा उर्फ चरकू के घर पर गोलीबारी की। इस दौरान रवि कुमार, निवासी केरेडारी (हजारीबाग) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि राजबल्लभ गोप गंभीर रूप से जख्मी हो गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उप महानिरीक्षक सह वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची ने तत्काल विशेष टीम का गठन किया। टीम का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) द्वितीय अरविन्द कुमार को सौंपा गया।

जांच में खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया कि इस गोलीकांड की जड़ें पुरानी दुश्मनी और बदले की भावना में छुपी हुई थीं। गिरफ्तार अभियुक्त कुणाल कुमार उर्फ बसंत यादव, ग्राम चकमे थाना बुढ़मू का रहने वाला है। कुणाल के पिता बुढ़मू प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी कार्यालय में कार्यरत हैं।

2017 में झखराटांड में घर बनाने के बाद से ही कुणाल और उसके पड़ोसी राजबल्लभ गोप के बीच जमीन विवाद और आपसी तनातनी जारी थी। एक वर्ष पूर्व राजबल्लभ गोप ने कुणाल के पिता के साथ सरेआम मारपीट की थी। इसी घटना ने कुणाल को गहराई से प्रभावित किया और उसने बदला लेने की ठान ली।

सुपारी देकर हत्या की साजिश

कुणाल ने अपने दोस्त लालमोहन प्रजापति और बबलू यादव के साथ मिलकर तीन ऐसे अपराधियों से संपर्क किया जो रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यात थे। योजना बनी कि राजबल्लभ गोप की हत्या की जाए और इसके लिए 5 लाख रुपये सुपारी के रूप में तय किए गए। अग्रिम रा​शि के रूप में कुणाल ने अपने दोस्तों को चार हजार रुपये भी दिए और शेष रा​​शि राजबल्लभ गोप की हत्या करने के बाद देने की बात हुई। 

6 सितंबर की शाम सभी अपराधी ठाकुरगांव में मिले और झखराटांड इलाके की रेकी की। उसी दौरान राजबल्लभ गोप को देखा गया। कुणाल ने अपने साथियों को पहचान कर दिखाया और हत्या की योजना को अंजाम देने का समय तय कर दिया।

7 सितंबर को शाम करीब 6:15 बजे अपराधी चरकू उर्फ प्रदीप लोहरा के घर पहुंचे। वहां सफेद शर्ट पहने हुए रवि कुमार को उन्होंने राजबल्लभ गोप समझ लिया और गोलियों की बौछार कर दी। इसी दौरान बचाव में आए राजबल्लभ गोप को भी गोली लगी। रवि कुमार की मौके पर ही मौत हो गई।

गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी छह अपराधियों कुणाल कुमार उर्फ बसंत यादव, लालमोहन प्रजापति, इमरोज अंसारी, बबलू यादव, श्रीचंद प्रजापति उर्फ चंदु और विजय प्रजापति उर्फ कालू  को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त तीन देशी पिस्टल, पांच जिंदा गोली, एक होंडा शाइन मोटरसाइकिल (JH01CD-3890), एक अल्टो कार (JH01CB-8310), छह एंड्रॉयड और तीन कीपैड मोबाइल फोन बरामद किए गए।

अपराधियों का इतिहास

गिरफ्तार अभियुक्तों का लंबा आपराधिक इतिहास है।

  • कुणाल यादव पूर्व में रातु थाना कांड संख्या 53/21 में नामजद रहा है।
  • लालमोहन प्रजापति के खिलाफ बुढ़मू और मांडर थाना में कई मुकदमे दर्ज हैं।
  • इमरोज अंसारी भी मांडर थाना कांडों में वांछित रहा है।
  • श्रीचंद प्रजापति पर हाल ही में लेवी मांगने और धमकी देने के मामले दर्ज हुए थे।

पुलिस की भूमिका

पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न सिर्फ एक बड़े आपराधिक गिरोह को बेनकाब किया बल्कि क्षेत्र में संभावित और बड़े अपराधों को भी रोका। छापामारी दल में डीएसपी अरविन्द कुमार के साथ रातु, बुढ़मू और मांडर थाना के पुलिस पदाधिकारी एवं सशस्त्र बल शामिल रहे। इस खुलासे के बाद इलाके के लोग राहत की सांस ले रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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