रांची: आगामी काली पूजा उत्सव को पर्यावरण के अनुकूल और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रतिमा विसर्जन को लेकर अधिसूचित संशोधित नियमों के तहत बोर्ड ने पूजा कमेटियों, स्थानीय शहरी निकायों और आम नागरिकों से नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।
बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी के अनुसार, पूजा पंडालों में प्लास्टर ऑफ पेरिस, पकी मिट्टी, रेजिन फाइबर और थर्माकोल से बनी मूर्तियों के उपयोग को पूरी तरह हतोत्साहित किया गया है। इसके स्थान पर प्राकृतिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों जैसे हल्दी व चंदन से सुसज्जित पानी में घुलनशील मूर्तियों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पूजा कमेटियों को केवल स्थानीय निकायों से पंजीकृत मूर्तिकारों से ही प्रतिमाएं खरीदने और आयोजन से पूर्व नगर निकायों से प्रबंधन योजना के साथ अनुमति लेने को कहा गया है।
पंडालों में थ्री-बिन सिस्टम और एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध
पंडालों में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण हेतु ‘थ्री-बिन सिस्टम’ लगाना अनिवार्य किया गया है। प्रसाद वितरण के लिए बर्तन बैंकों के धातु, कांच के बर्तन या केले, पलाश, साल व सखुआ के पत्तों से बनी पारंपरिक पत्तलों और मिट्टी के कुल्हड़ों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। विसर्जन से पहले फूल, माला, वस्त्र और सजावटी सामग्री को अलग कर निर्धारित रंगीन डिब्बों में एकत्र करना होगा, ताकि जलस्रोतों को दूषित होने से बचाया जा सके।
प्रशासन और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारियां तय
निर्देशानुसार, नगर निकाय व जिला प्रशासन केवल प्राकृतिक मिट्टी का उपयोग करने वाले पंजीकृत मूर्तिकारों को ही लाइसेंस देंगे। साथ ही जलस्रोतों की क्षमता के आधार पर मूर्तियों की ऊंचाई भी तय की जाएगी। नदियों और झीलों में सीधे विसर्जन के बजाय तटबंधों वाले अस्थायी कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था करने को कहा गया है। विसर्जन के 24 घंटे के भीतर विसर्जन स्थलों की पूरी सफाई और कचरा निष्पादन का जिम्मा स्थानीय निकायों का होगा।
बोर्ड ने आम नागरिकों और परिवारों से भी अपील की है कि वे घरों में छोटी प्राकृतिक मूर्तियों की पूजा करें और उनका विसर्जन घर पर ही अथवा नगर निकाय द्वारा उपलब्ध कराए गए सचल व कृत्रिम टैंकों में करें। पूजा सामग्री को पॉलीथीन में बांधकर सीधे नदियों या तालाबों में फेंकना पूर्णतः प्रतिबंधित है।




