पश्चिमी सिंहभूम : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के टोटो प्रखंड स्थित ऐतिहासिक सेरेंगसिया घाटी पहुंचकर अमर शहीद पोटो हो और अन्य वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने न केवल शहीदों के बलिदान को याद किया, बल्कि जिले के विकास के लिए 398 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन किया और लाभार्थियों के बीच 637 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण कर कोल्हान को बड़ी सौगात दी।
शहीदों का सपना और सशक्तिकरण का संकल्प
मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड का इतिहास संघर्षों और बलिदानों का रहा है। उन्होंने पोटो हो, भगवान बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू जैसे नायकों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी सरकार शहीदों के सपनों के अनुरूप झारखंड के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचा रही है। “आज सरकार हेडक्वार्टर से नहीं, बल्कि गांवों से चल रही है,” सोरेन ने जोर देकर कहा कि उनकी नीतियों का केंद्र ग्रामीण और गरीब आबादी है।
शिक्षा को प्रगति का आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्कूल जरूर भेजें। उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि राज्य की 18 से 50 वर्ष की महिलाओं को अब हर वर्ष 30 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही उन्होंने नियुक्ति पत्र वितरण के माध्यम से 1479 युवाओं के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी।
सेरेंगसिया की मिट्टी 1837 के उस महान संघर्ष की गवाह है, जब पोटो हो और उनके वीर साथियों ने अंग्रेजों की आधुनिक सेना का मुकाबला पारंपरिक तीर-धनुष से किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोल्हान के वीरों ने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए जो शहादत दी, उसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा मांझी और अन्य विधायकों की उपस्थिति ने इस राजकीय समारोह को भव्य रूप दिया।



