दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में राजनीतिक नेताओं और वकीलों को हिरासत में लेने, पुलिस की कार्रवाई, मेट्रो स्टेशनों और सड़कों को बंद करने के साथ फोन जैमर के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं।
मेट्रो स्टेशन बंद करने पर कोर्ट ने मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शनिवार रात 10 बजे से सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए हैं। वहीं, इंटरनेट सेवाएं भी बहाल कर दी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने DMRC से उन मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा है, जहां प्रवेश और निकास पर पाबंदी लगाई गई थी। कोर्ट ने सवाल किया कि पहले 57 स्टेशन बंद करने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में 45 स्टेशनों पर ही पाबंदी क्यों लगाई गई।
बिना कानूनी प्रक्रिया किसी को हिरासत में नहीं लेने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में लोगों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहनी चाहिए। प्रतिबंधित क्षेत्रों से बाहर शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन करने वाले लोगों को कानून में तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाए। अदालत ने केंद्र सरकार से सभी याचिकाओं पर जवाब और आदेशों के पालन की रिपोर्ट मंगलवार तक दाखिल करने को कहा है।
कोर्ट में नारेबाजी पर जजों ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने पुलिस पर 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में मारपीट करने का आरोप लगाया। इसी बीच कोर्टरूम में कुछ वकीलों ने ‘शेम-शेम’ के नारे लगाए। इस पर जजों ने नाराजगी जताते हुए सभी को अनुशासन बनाए रखने की हिदायत दी। अदालत ने कहा कि रविवार को विशेष परिस्थितियों में सुनवाई हो रही है, इसलिए मामले की गंभीरता को समझना जरूरी है।



