Patna: राजधानी पटना के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ताओं के अधिकारों के हनन और मनमाने व्यापारिक व्यवहार के खिलाफ एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने सिनेमाघर परिसर में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर (बोतलबंद पानी) की तय कीमत से अधिक दाम वसूले जाने को अनुचित व्यापार व्यवहार करार दिया है। इस मामले में पटना स्थित सिनेपोलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी को संयुक्त रूप से दोषी मानते हुए कुल 85,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
यह महत्वपूर्ण आदेश आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार की बेंच द्वारा 5 अक्टूबर 2026 को पारित किया गया।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला साल 2016 का है। परिवादी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि 23 सितंबर 2016 को वह पटना के सिनेपोलिस थिएटर में फिल्म देखने गया था। इस दौरान उसे सिनेमाघर के अंदर 50 रुपये में पैकेज्ड पेयजल खरीदने के लिए बाध्य किया गया, जबकि वही उत्पाद खुले बाजार में महज 20 रुपये में आसानी से उपलब्ध था।
शिकायतकर्ता का मुख्य आरोप था कि सिनेमाघर प्रबंधन ने न केवल बाहर से पानी की बोतल लाने पर सख्त पाबंदी लगा रखी थी, बल्कि अंदर आने वाले दर्शकों को अपनी ही शर्तों पर अधिक कीमत चुकाकर पानी खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। इसे उपभोक्ता अधिकारों का हनन बताते हुए हर्जाने की मांग की गई थी।
आयोग की सख्त टिप्पणी और निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि उपभोक्ताओं को बाहर से पानी लाने से रोकना और एक ही सामान के लिए मनमाने तरीके से दोहरी कीमत (Dual Pricing) वसूलना सरासर गलत है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समान उत्पाद के लिए अलग-अलग और मनमाने दाम तय करके उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
आयोग ने अपने फैसले में सिनेपोलिस सिनेमा हॉल और कोका-कोला कंपनी को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
क्षतिपूर्ति और हर्जाना: परिवादी (उपभोक्ता) को मानसिक और आर्थिक परेशानी के लिए 25,000 रुपये क्षतिपूर्ति और 10,000 रुपये वाद व्यय (मुकदमे का खर्च) के रूप में दिए जाएंगे।
राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष: कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 50,000 रुपये की राशि राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने का आदेश दिया गया है।
कीमतों पर लगाम: सिनेमा परिसर में या किसी भी अन्य स्थान पर पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर या अन्य उत्पादों को खुले बाजार में प्रचलित एमआरपी (MRP) से अधिक कीमत पर बेचने की प्रथा को तुरंत बंद किया जाए। साथ ही बोतलों पर अधिकतम खुदरा मूल्य को स्पष्ट और पढ़ने योग्य तरीके से प्रदर्शित करने का निर्देश भी दिया गया है।
45 दिनों के भीतर करना होगा आदेश का पालन
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का अनुपालन 45 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है। यदि तय समय-सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो निर्धारित कुल राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देना होगा।
इसके साथ ही, उपभोक्ताओं के साथ हो रहे ऐसे आर्थिक शोषण को रोकने के लिए विधिक माप विज्ञान विभाग (Legal Metrology Department) और उपभोक्ता संरक्षण मंत्रालय को भी निर्देश दिया गया है कि वे एक ही उत्पाद के लिए बाजार में मनमाने दोहरे मूल्य निर्धारण (Dual MRP) की अनुमति बिल्कुल न दें। अदालत के इस कड़े रुख से मल्टीप्लेक्स और बड़े ब्रांड्स मनमानी कीमतें वसूलने से पहले अब सौ बार सोचेंगे।




