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India News: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में एक अनोखी पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत पहले शिक्षकों को शतरंज की ट्रेनिंग दी जा रही है और बाद में वही शिक्षक बच्चों को शतरंज सिखाकर उन्हें मोबाइल की लत से दूर करने का प्रयास करेंगे। शतरंज को दिमाग का खेल कहा जाता है। यह खेल एकाग्रता, धैर्य और तार्किक सोच को मजबूत करने में मदद करता है।
मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए शतरंज को चुनना एक रचनात्मक और व्यावहारिक उपाय है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को स्क्रीन टाइम से हटाकर बौद्धिक और रचनात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ना है। दक्षिण 24 परगना चेस एसोसिएशन और स्कूल इंस्पेक्टर के सहयोग से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में शिक्षकों को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे इसे स्कूलों में नियमित गतिविधि के रूप में लागू कर सकें।
शतरंज के कई फायदे बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह खेल दिमाग को सक्रिय रखता है और समस्या सुलझाने की क्षमता को बढ़ाता है। इसके अलावा, यह बच्चों को तुरंत परिणाम की चाह से दूर करके धीरे-धीरे सोचने और योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ने की आदत डालता है। शतरंज खेलने के लिए किसी स्क्रीन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे बच्चे वास्तविक दुनिया में समय बिताते हैं और उनकी आंखों व दिमाग को भी आराम मिलता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि शतरंज बच्चों को मोबाइल से दूर रखने का एक प्रभावी विकल्प हो सकता है।
इसमें एकाग्रता की आवश्यकता होती है, जो बच्चों को लंबे समय तक खेल में व्यस्त रखती है। यह खेल सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ाता है, क्योंकि इसे दोस्तों और परिवार के साथ खेला जा सकता है। साथ ही, यह रणनीति और लॉजिकल थिंकिंग विकसित करने का अवसर देता है, जो मोबाइल गेम्स से कहीं अधिक संतुष्टि प्रदान करता है। इस पहल को सफल बनाने के लिए स्कूलों में शतरंज क्लब खोले जा सकते हैं, जहां बच्चे नियमित रूप से खेल सकें। घर पर भी माता-पिता बच्चों के साथ शतरंज खेलकर इसे पारिवारिक गतिविधि बना सकते हैं।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन करके बच्चों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा की जा सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करना और उसके स्थान पर शतरंज जैसे खेलों के लिए समय निर्धारित करना जरूरी है। मालूम हो कि आज के डिजिटल दौर में बच्चों और युवाओं में मोबाइल फोन की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी है। लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने से उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।

