दावोस/रांची। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के वैश्विक मंच से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के भविष्य को लेकर स्पष्ट और प्रेरक संदेश दिया है। दावोस, स्विट्जरलैंड से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी यह यात्रा झारखंड के पुरखों और बाबा दिशोम गुरुजी के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से है। उनका संकल्प है कि युवा झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम झारखंड के लिए वैश्विक निवेश और साझेदारी के नए अवसर लेकर आया है। इस मंच से झारखंड में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और राज्य की संभावनाओं को दुनिया के सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब झारखंड आगे बढ़ेगा, तभी राज्यवासी भी समृद्धि की राह पर आगे बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष सह विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन झारखंड के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ दावोस यात्रा पर हैं। इस दौरान राज्य में विदेशी निवेश की संभावनाओं को लेकर कई वैश्विक उद्योग समूहों और संस्थानों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं।
दावोस में मुख्यमंत्री ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि भी हासिल की। वे भारत के पहले आदिवासी निर्वाचित नेता बने, जिन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में भाग लिया। झारखंड में उनके नेतृत्व में हो रहे परिवर्तनकारी कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें प्रतिष्ठित व्हाइट बैज से सम्मानित किया गया। इस सम्मान को मुख्यमंत्री ने पूरे झारखंड और राज्यवासियों को समर्पित करते हुए कहा कि यह गौरव राज्य के हर नागरिक का है।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में बताया कि दावोस में विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ झारखंड में निवेश को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है और आगे भी कई ग्लोबल लीडर्स से चर्चा प्रस्तावित है। इन बैठकों में झारखंड को टिकाऊ उद्योग, हरित ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल तकनीक और जलवायु-अनुकूल औद्योगिक विकास के केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
गौरतलब है कि दावोस में मुख्यमंत्री की टाटा स्टील, हिताची, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, इंफोसिस, वेलस्पन, एबी इनबेव, ब्लूमबर्ग, टेक महिंद्रा, अल्फानार, रामकी ग्रुप, एवरस्टोन ग्रुप सहित स्वीडन, अमेरिका और यूरोप की वैश्विक व्यापार परिषदों एवं संस्थानों के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें हो चुकी हैं। इन चर्चाओं को झारखंड में निवेश के नए द्वार खुलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दावोस से दिया गया मुख्यमंत्री का यह संदेश झारखंड की वैश्विक पहचान, आत्मविश्वास और भविष्य-दृष्टि को मजबूत करता है।



