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CBI ने BSF ऑफिस में 40 हजार की रिश्वत लेते अधिकारी को दबोचा, जांच तेज

India News: CBI ने भ्रष्टाचार पर एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए BSF कार्यालय में तैनात सहायक लेखा अधिकारी (एएओ) धर्मेंद्र कुमार वर्मा को 40,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 18 जुलाई को तब की गई जब CBI को

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India News: CBI ने भ्रष्टाचार पर एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए BSF कार्यालय में तैनात सहायक लेखा अधिकारी (एएओ) धर्मेंद्र कुमार वर्मा को 40,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 18 जुलाई को तब की गई जब CBI को शिकायत मिली कि आरोपी एएओ वेतन और बकाया बिलों के भुगतान के लिए 2 लाख रुपये की भारी रिश्वत मांग रहा है।

कैसे खुला रिश्वतखोरी का मामला?

शिकायतकर्ता ने CBI को बताया कि एएओ धर्मेंद्र वर्मा ने उसके वेतन और लंबित बिलों के भुगतान के बदले 15-20% रिश्वत मांगी थी। यह राशि कुल मिलाकर करीब 2 लाख रुपये थी। शिकायतकर्ता ने इस डिमांड की जानकारी CBI को दी।

CBI ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ट्रैप ऑपरेशन की योजना बनाई। तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता ने 40,000 रुपये की पहली किस्त आरोपी को देने का नाटक किया। जैसे ही धर्मेंद्र वर्मा ने राशि ली, CBI की टीम ने उन्हें मौके पर रंगे हाथों दबोच लिया।

पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी CBI

CBI अधिकारियों के अनुसार, यह 40,000 रुपये सिर्फ पहली किस्त थी, जो कुल 2 लाख रुपये की रिश्वत मांग का हिस्सा थी। गिरफ्तारी के बाद CBI ने मौके पर तलाशी ली और रिश्वत की राशि को बरामद कर लिया।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस पूरे रिश्वतखोरी नेटवर्क में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में कुछ संदिग्ध लेन-देन के सबूत मिले हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है।

आगे क्या?

आरोपी धर्मेंद्र वर्मा को गिरफ्तार कर CBI की हिरासत में ले लिया गया है। उसे जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई होगी।
CBI का कहना है कि अगर अन्य अधिकारियों की संलिप्तता साबित हुई, तो आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

BSF में सतर्कता का माहौल

इस कार्रवाई के बाद BSF के अन्य अधिकारियों में सतर्कता का माहौल है। CBI अधिकारियों का कहना है कि वेतन और बिल भुगतान जैसे बुनियादी कार्यों में रिश्वतखोरी की शिकायतें गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं। इस मामले ने BSF कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।

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