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World News: डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद व्यापार नीति में बदलाव की उम्मीद थी, और अब टैरिफ वार का असर दिखने लगा है। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया है, इससे भारतीय निर्यातकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इस बढ़े हुए टैरिफ का सीधा असर उन अमेरिकी कंपनियों पर पड़ रहा है, जो भारत से सामान खरीदती हैं। बढ़ी हुई लागत के कारण वॉलमार्ट और अमेजान जैसी कंपनियों ने फिलहाल भारतीय कंपनियों से ऑर्डर रोक दिए हैं या रद्द कर दिए हैं। उन्हें डर है कि ज्यादा कीमत वाले भारतीय सामान की अमेरिका में मांग कम होगी। इसके लिए आधी रात को आदेश आए।
टेक्सटाइल सेक्टर की भारतीय कंपनी पर्ल ग्लोबल के मैनेजिंग डायरेक्टर पल्लब बनर्जी ने बताया कि अमेरिकी खरीदार चाहते हैं कि या तो भारतीय निर्यातक बढ़े हुए टैरिफ का बोझ खुद उठाएं, या फिर वे भारत के बजाय बांग्लादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों से खरीदी की जाएगी, जहां टैरिफ दरें कम हैं। भारत पर 50 प्रतिशत का कुल टैरिफ दो हिस्सों में लागू हो रहा है। पहला 25 प्रतिशत टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो गया है, जबकि दूसरा 25 प्रतिशत टैरिफ 28 अगस्त से लागू होगा। जहां भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा है, वहीं बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों पर यह सिर्फ 20 प्रतिशत है और चीन पर 30 प्रतिशत का टैरिफ ठोंक दिया है।
इस अंतर से भारतीय सामान की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाते। भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के इस कदम को अन्यायपूर्ण, अनुचित और तर्कहीन बताकर कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। इस स्थिति से भारतीय निर्यातकों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। उन्हें या अपने व्यापार का तरीका बदलना होगा या फिर नए बाजारों की तलाश करनी होगी। वहीं ट्रंप के टैरिफ वार पर पीएम मोदी दो टूक कह चुके हैं कि भारतीय किसान और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पीएम मोदी का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता हैं कि भारत ट्रंप के सामने झुकने वाला नहीं है। बाजार जानकारों के मुताबिक भारत को इस परिस्थिति से बहुत ही सोच-समझकर निकलना होगा।

