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प्रेम विवाह में बाधा बनी सास का बेरहमी से कत्ल, कोर्ट ने ठुकराई जमानत

रांची: प्यार जब जुनून और सनक की हदें पार कर जाए, तो वह खौफनाक मंजर पैदा करता है। झारखंड की राजधानी रांची से सटे तमाड़ इलाके में एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां प्रेम विवाह में रोड़ा बनने पर

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रांची: प्यार जब जुनून और सनक की हदें पार कर जाए, तो वह खौफनाक मंजर पैदा करता है। झारखंड की राजधानी रांची से सटे तमाड़ इलाके में एक ऐसी ही रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां प्रेम विवाह में रोड़ा बनने पर एक युवक ने अपनी होने वाली सास की कुल्हाड़ी से काटकर बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध पर कड़ा रुख अपनाते हुए रांची के अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने आरोपित मांगा मुंडा की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

शादी की जिद और रंजिश की शुरुआत

इस खूनी दास्तां की पटकथा 16 जनवरी 2026 की रात को लिखी गई थी। पुलिस तफ्तीश और अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार, कहानी की मुख्य पात्र जम्बी कुमारी की शादी पहले खूंटी के लाचू पाहन से हुई थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शादी के महज दो महीने बाद एक सड़क हादसे ने जम्बी के पति को उससे छीन लिया। विधवा होने के बाद जम्बी अपने मायके लौट आई, जहां उसकी मां ने उसे उसकी दादी के घर भेज दिया।

यहीं जम्बी की मुलाकात उसके एक दूर के रिश्तेदार मांगा मुंडा से हुई। दोनों के बीच प्रेम संबंध पनपा, लेकिन जब यह बात परिवार तक पहुंची, तो विरोध के स्वर उठने लगे। रिश्तेदारी की मर्यादा के कारण जम्बी की मां इस विवाह के सख्त खिलाफ थी। इसी ‘ना’ ने मांगा मुंडा के भीतर नफरत का ऐसा बीज बोया कि उसने खौफनाक कदम उठाने की ठान ली।

नींद में किया कुल्हाड़ी से वार

आरोपित लगातार धमकी दे रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वह मौत बनकर घर में दाखिल होगा। 16 जनवरी की काली रात, जब पूरा परिवार खाना खाकर गहरी नींद में था, मांगा मुंडा चुपके से घर में घुसा। उसने सो रही जम्बी की मां पर कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार किए। प्रहार इतना घातक था कि मौके पर ही उनकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

कानूनी शिकंजा और अदालत का कड़ा संदेश

तमाड़ पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कांड संख्या 6/2026 दर्ज कर आरोपित को जेल भेजा था। अदालत में बचाव पक्ष ने जमानत के लिए दलीलें दीं, लेकिन लोक अभियोजक ने मामले की क्रूरता और सबूतों को देखते हुए इसका कड़ा विरोध किया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसे गंभीर और समाज को झकझोर देने वाले मामलों में राहत की कोई गुंजाइश नहीं है। आरोपित को फिलहाल सलाखों के पीछे ही रहना होगा, जबकि मामले का स्पीडी ट्रायल जारी है।

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