Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। विशेष रूप से पोटका प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। सोमवार सुबह पोटका प्रखंड की हरिणा पंचायत स्थित कंदर गांव की एक वर्षीय खुशबू सरदार की एमजीएम अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह पिछले चार दिनों से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी। इससे पहले उसकी आठ वर्षीय बड़ी बहन सुबोला सरदार की भी ब्रेन मलेरिया के कारण मौत हो चुकी थी। चार दिनों के भीतर एक ही परिवार की दो मासूम बेटियों की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है और परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूट पड़ा है, जिससे उबर पाना आसान नहीं होगा।

मृत बच्चियों के पिता महावीर सरदार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। लगातार दो बेटियों को खोने के बाद उनकी तीसरी बेटी भी तेज बुखार से पीड़ित है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है। महावीर सरदार का कहना है कि उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे एक बेटी का अंतिम संस्कार करें या दूसरी बीमार बेटी का इलाज कराएं। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि अस्पताल आने-जाने और दवाइयों का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है। उनकी आंखों से बहते आंसू और टूटी हुई आवाज इस त्रासदी की भयावहता को बयां कर रही है।

कंदर गांव लंबे समय से मलेरिया प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में समय पर मच्छर नियंत्रण के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। कई लोगों का कहना है कि अब तक सभी जरूरतमंद परिवारों को मच्छरदानियां उपलब्ध नहीं कराई गई हैं और न ही जलजमाव वाले स्थानों तथा पेयजल स्रोतों के आसपास नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव किया गया। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते रोकथाम के प्रभावी उपाय किए जाते तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पूर्वी सिंहभूम जिले में अब तक 60 से अधिक लोग ब्रेन मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। इनमें सबसे अधिक 43 मरीज अकेले पोटका प्रखंड से मिले हैं। जिले में अब तक चार बच्चों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। मेडिकल टीमें घर-घर जाकर बुखार से पीड़ित लोगों की जांच कर रही हैं। संदिग्ध मरीजों का तत्काल मलेरिया टेस्ट कराया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. रजनी महाकुंड ने बताया कि कंदर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में लगातार स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से गांवों का दौरा कर रही हैं और लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी जा रही है। उनके अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी मरीज को इलाज में लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।

चिकित्सकों का कहना है कि ब्रेन मलेरिया, जिसे सेरेब्रल मलेरिया भी कहा जाता है, मलेरिया का सबसे गंभीर रूप है। यह बीमारी मस्तिष्क को प्रभावित करती है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। छोटे बच्चों में इसका खतरा अधिक होता है। तेज बुखार, लगातार सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी, दौरे पड़ना और मानसिक भ्रम इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

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