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रांची: झारखंड के महानायक, पूर्व मुख्यमंत्री और ‘बाबा-ए-झारखंड’ के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन के जीवन संघर्ष पर आधारित एक अनूठी पुस्तक इन दिनों देशव्यापी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। डॉ. जमाल अहमद द्वारा रचित पुस्तक “बाबा-ए-झारखंड : ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन दानिश्वरों की नजर में” को युवाओं और सुधी पाठकों द्वारा हाथों-हाथ लिया जा रहा है। विशेष बात यह है कि ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के ऐतिहासिक जीवन, उनके सामाजिक-सांस्कृतिक सफर और जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा के लिए की गई उनकी लंबी लड़ाई पर उर्दू भाषा में लिखी गई यह पहली व्यापक और शोधपरक कृति है।
इस साहित्यिक व ऐतिहासिक योगदान के लिए मानव सेवा को समर्पित संस्था ‘लोक सेवा समिति’ द्वारा रांची के मेन रोड स्थित होटल द केन में आयोजित एक भव्य समारोह में डॉ. जमाल अहमद को राज्य के सर्वोच्च सम्मान झारखंड रत्न से विभूषित किया गया। समिति के अध्यक्ष मोहम्मद नौशाद खान और चयन समिति के संयोजक चंचल भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से इस गौरवपूर्ण पुरस्कार की घोषणा की।
इस पुस्तक में देश के जाने-माने विद्वानों, वरिष्ठ पत्रकारों, डॉक्टरों और शिक्षकों के दृष्टिकोण से शिबू सोरेन के बहुआयामी व्यक्तित्व को उकेरा गया है। पुस्तक की बढ़ती लोकप्रियता और जनआंदोलनों में शिबू सोरेन की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए अब यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि भारत सरकार उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करे। पाठकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि शिबू सोरेन जैसा दूरदर्शी नेतृत्व न होता, तो आज झारखंड के आदिवासी और मूलवासी समुदाय अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हो जाते। यह कृति न केवल नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है, बल्कि झारखंड आंदोलन के इतिहास को समझने का एक प्रामाणिक दस्तावेज बन चुकी है।

