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बोकारो से रामगढ़ तक में हाथियों का तांडव; 90 दिनों में 13 लोगों की ली जान

Bokaro: झारखंड के बोकारो और रामगढ़ के ग्रामीण इलाकों में सूरज ढलते ही अब सन्नाटा नहीं, बल्कि मौत का डर पसर जाता है। हाथियों ने पिछले 90 दिनों में जो ‘मौत का तांडव’ शुरू किया है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा। 10 नवंबर

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Bokaro: झारखंड के बोकारो और रामगढ़ के ग्रामीण इलाकों में सूरज ढलते ही अब सन्नाटा नहीं, बल्कि मौत का डर पसर जाता है। हाथियों ने पिछले 90 दिनों में जो ‘मौत का तांडव’ शुरू किया है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा। 10 नवंबर 2025 से लेकर 7 फरवरी 2026 तक, इन गजराजों ने 13 बेगुनाहों को बेरहमी से कुचलकर मार डाला है। आलम यह है कि अब हाथी केवल जंगलों में नहीं, बल्कि घर की दीवारें तोड़कर लोगों को खींच रहे हैं।

मासूम अमन और दादा सोमर साव की दर्दनाक मौत : शुक्रवार, 6 फरवरी को महुआटांड़ के गंगापुर गांव में जो हुआ, उसने हर किसी की रूह कंपा दी। गांव में बिजली नहीं थी, 55 वर्षीय सोमर साव अपने 4 साल के पोते अमन के साथ घर के बाहर पेड़ के पास बैठे थे। अचानक हाथियों के झुंड ने हमला कर दिया। दोनों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथियों ने उन्हें कुचल दिया। इस हमले में परिवार के 5 अन्य सदस्य, जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं, बुरी तरह घायल हो गए।

बड़कीपुनु: एक ही घर के तीन सदस्यों की बलि : इससे ठीक एक दिन पहले, 5 फरवरी को ललपनिया के बड़कीपुनु में हाथियों ने हैवानियत की हदें पार कर दीं। हाथियों ने घर की दीवार तोड़ी और भीतर सो रहे 65 वर्षीय गांगो करमाली, उनकी पत्नी कमली देवी और भाभी भगिया देवी को घर के भीतर ही मार डाला। यह केवल हमला नहीं, बल्कि इंसानी बस्तियों में हाथियों का सीधा हस्तक्षेप है।

90 दिनों का ‘डेथ कैलेंडर’ हाथियों का यह खूनी सफर लगातार जारी है:

  • 24 जनवरी: गोमिया में करमचंद सोरेन को घर से निकालकर मार डाला।

  • 19 जनवरी: रामगढ़ के रविन्द्र दांगी को उनकी कार से खींचकर पटक दिया।

  • 16 नवंबर: खाखड़ा में साझो देवी को रात 11 बजे घर से खींचकर मार डाला।

  • 10 नवंबर: तिलैया में होटल में खाना खा रहे प्रकाश और चरकु महतो को कुचल दिया।

क्या प्रशासन के पास केवल ‘अपील’ है? : वन विभाग लगातार लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जब हाथी घर की दीवारें तोड़ रहे हैं, तो लोग कहां सुरक्षित रहें? विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के कॉरिडोर में इंसानी दखल और जंगलों की कटाई ने उन्हें ‘नरभक्षी’ जैसा हिंसक बना दिया है। फिलहाल पूरा इलाका दहशत में है और लोग पूछ रहे हैं कि यह सिलसिला आखिर कब रुकेगा?

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