Bodhgaya: भगवान बुद्ध की पावन ज्ञानस्थली और वैश्विक आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र बोधगया अब पर्यावरण अनुकूल पर्यटन (इको-टूरिज्म) के नए रूप में उभर रहा है। विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर, पवित्र बोधिवृक्ष और समृद्ध बौद्ध विरासत के साथ-साथ अब यहां के ऐतिहासिक सरोवर, हरियाली, पहाड़ियां और शांत प्राकृतिक परिवेश पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बन रहे हैं। बिहार सरकार का उद्देश्य बोधगया की आध्यात्मिक गरिमा और प्राकृतिक सुंदरता को संजोते हुए यहां सस्टेनेबल और जिम्मेदार पर्यटन का एक आधुनिक मॉडल स्थापित करना है।
माया सरोवर में प्रकृति और आधुनिक मनोरंजन का मेल
बोधगया स्थित माया सरोवर को लगभग पांच एकड़ के विशाल हरित परिसर में विकसित किया गया है। यहां का विशाल जलाशय, चारों तरफ फैली हरियाली और भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन पर आधारित आधुनिक लेजर शो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और उनके परिवारों के लिए विशेष आकर्षण साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही मुचलिंद सरोवर, सुजाता स्तूप, डुंगेश्वरी गुफा क्षेत्र और आसपास की सुरम्य पहाड़ियों को जोड़कर एक संपूर्ण प्राकृतिक व आध्यात्मिक टूरिज्म सर्किट का रूप दिया जा रहा है।
नेचर वॉक, ट्रेकिंग और बर्ड वॉचिंग पर फोकस
बिहार की नई पर्यटन नीति के तहत इन क्षेत्रों में पर्यटकों को प्रकृति के और करीब लाने की तैयारी है। इसके अंतर्गत:
साहसिक और प्राकृतिक गतिविधियां: सुरक्षित नेचर वॉक, पहाड़ियों पर ट्रेकिंग, पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) और नेचर कैंपिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
इको-फ्रेंडली सुविधाएं: पर्यटकों के लिए पर्यावरण-अनुकूल आवास (इको-कॉटेज) और एक अत्याधुनिक विजिटर इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा, जहां वे स्थानीय जैव-विविधता और इतिहास को समझ सकेंगे।
पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा, स्थानीय युवाओं को रोजगार
इस इको-टूरिज्म मॉडल का सीधा लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा। बोधगया में प्राकृतिक पर्यटन के विस्तार से विदेशी और घरेलू पर्यटकों के रुकने की अवधि (स्टे ड्यूरेशन) में बढ़ोतरी होगी। इससे स्थानीय गाइड, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्ट, होटल व्यवसाय और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े कामगारों को सीधे आजीविका मिलेगी। साथ ही गया और बोधगया के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को बड़ा वैश्विक बाजार उपलब्ध हो सकेगा। राज्य सरकार का यह प्रयास विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है।




