Patna: बिहार में बाढ़, वज्रपात, अग्निकांड समेत अन्य आपदाओं के दौरान लोगों तक त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए युवाओं का प्रशिक्षित नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की युवा आपदा मित्र योजना के तहत राज्य में अब तक 19 हजार से अधिक युवा आपदा मित्र तैयार किए जा चुके हैं। इनमें जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के बीच 10,233 युवाओं को राहत और बचाव से जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) इस योजना के तहत संगठित, प्रशिक्षित और समर्पित युवा स्वयंसेवकों का नेटवर्क तैयार करने के लिए अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य आपदा के समय स्थानीय स्तर पर तेजी से मदद पहुंचाने में सक्षम युवाओं को तैयार करना है।
सात दिनों की आवासीय ट्रेनिंग
योजना के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, नेहरू युवा केंद्र संगठन और राष्ट्रीय कैडेट कोर के स्वयंसेवकों का चयन किया जा रहा है। चयनित युवाओं को सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है। यह प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं है। युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, त्वरित निर्णय क्षमता, नेतृत्व और समन्वय जैसे गुण विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे आत्मविश्वासी स्वयंसेवक तैयार करना है, जो कठिन परिस्थितियों में संयम रखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने में सक्षम हों।
बाढ़ और वज्रपात में स्थानीय स्तर पर करेंगे मदद
प्राधिकरण के वरीय सलाहकार अशोक कुमार शर्मा के मुताबिक, बिहार जैसे आपदा-प्रवण राज्य में युवाओं का प्रशिक्षित नेटवर्क बेहद महत्वपूर्ण है। बाढ़, वज्रपात, अग्निकांड और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्थानीय स्तर पर सबसे पहले सहायता पहुंचाने में इन युवाओं की भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि युवा आपदा मित्रों की जिम्मेदारी केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहेगी। वे अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने, सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने और समुदाय को आपदा के लिए तैयार करने में भी योगदान देंगे।
विभागों के साथ समन्वय कर पहुंचाएंगे मदद
अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि राज्य के किसी भी हिस्से में आपदा की स्थिति पैदा होने पर युवा आपदा मित्र संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित मदद पहुंचाने का काम करेंगे। योजना का उद्देश्य आपदा प्रबंधन को केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित न रखते हुए प्रशिक्षित युवाओं को भी इससे जोड़ना है। संकट के समय ये स्वयंसेवक स्थानीय स्तर पर प्रशासन और लोगों के बीच समन्वय स्थापित कर सहायता पहुंचाने में भूमिका निभाएंगे।




