Patna: बिहार सरकार की ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ राज्य के कर्मठ, हुनरमंद और आत्मविश्वासी युवाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। आर्थिक तंगी और पूंजी के अभाव के कारण जिन प्रतिभाओं के सपने दम तोड़ देते थे, आज वही युवा इस योजना के संबल से न सिर्फ सफल कारोबारी बन रहे हैं, बल्कि दर्जनों लोगों को आजीविका भी मुहैया करा रहे हैं। पूर्वी चंपारण के इम्तियाज अली और मधेपुरा के अजय कुमार पासवान की सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अगर हुनर को सरकारी सहयोग और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो अभावों की जमीन से भी करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है।
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साइबर कैफे से गारमेंट फैक्ट्री तक

पूर्वी चंपारण के इम्तियाज अली बचपन से ही रेडीमेड कपड़ों का कारखाना लगाना चाहते थे, लेकिन घर की खराब माली हालत के चलते उन्हें गुजारे के लिए साइबर कैफे और अन्य दुकानों पर छोटी-मोटी नौकरियां करनी पड़ीं। इसी बीच समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें मुख्यमंत्री उद्यमी योजना की जानकारी मिली, जिसके बाद उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया। चयन के बाद सरकार द्वारा उन्हें मुफ्त व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया गया और तीन किस्तों में 7.50 लाख रुपये का ऋण मिला। इस राशि से इम्तियाज ने शेड बनवाया, आधुनिक मशीनें खरीदीं और ‘अली इंटरप्राइजेज’ के नाम से गारमेंट फैक्ट्री शुरू की। आज उनके कारखाने में पांच लोग नियमित काम कर रहे हैं और उनके तैयार कपड़ों की मांग बिहार के अलावा अन्य राज्यों के बाजारों में भी हो रही है।
मधेपुरा के अजय ने रचा इतिहास
ऐसी ही दूसरी प्रेरक कहानी मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर प्रखंड अंतर्गत बसहा टोला (कमरगामा) के रहने वाले अजय कुमार पासवान की है। कभी रोजगार की तलाश में दर-दर भटकने वाले अजय ने अपने हुनर पर भरोसा जताया और मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से 10 लाख रुपये की परियोजना राशि स्वीकृत कराई। इस आर्थिक मदद से उन्होंने ‘प्रतीक इंटरप्राइजेज’ की स्थापना की। शुरुआत में छोटे स्तर पर काम शुरू करने वाले अजय की इस इकाई में आज अनुभवी कारीगरों की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले सोफा, पलंग, ड्रेसिंग टेबल, मेट्रेस, गोदरेज, ट्रंक और बक्से तैयार किए जाते हैं। ग्राहकों के विश्वास और समय पर डिलीवरी ने उनके कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाया।
1 करोड़ टर्नओवर, हाईवे पर विस्तार
अजय कुमार का यह उद्यम आज 7 से 8 स्थानीय कामगारों को सीधा रोजगार उपलब्ध करा रहा है। अजय बताते हैं कि उनकी फर्नीचर निर्माण इकाई का वार्षिक कारोबार अब ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंच चुका है। अपने इस सफल व्यवसाय को और बड़े मुकाम पर ले जाने के लिए वे इसे राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-106) के समीप स्थानांतरित करने की योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि आधुनिक शोरूम के जरिए पूरे कोसी और सीमांचल क्षेत्र में सीधे सप्लाई की जा सके। दोनों सफल उद्यमियों का कहना है कि आज के बिहार में युवाओं के लिए पूंजी कोई बाधा नहीं है, बस हौसला और काम करने की लगन होनी चाहिए।




