Patna: नेपाल में गंडक नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति और नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका के बीच बिहार में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बाढ़ संभावित इलाकों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई अहम निर्देश दिए गए। बैठक में खास तौर पर बोट एम्बुलेंस, 60 जरूरी दवाओं का बफर स्टॉक, गर्भवती महिलाओं की मैपिंग और राहत शिविरों के पास अस्थायी मेडिकल कैंप की व्यवस्था की समीक्षा की गई।
6 जिलों पर विशेष नजर, संवेदनशील इलाकों की होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ की आशंका वाले छह प्रमुख जिलों पर विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। इनमें पश्चिमी चंपारण (बेतिया), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली शामिल हैं। इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर समेत अन्य संवेदनशील जिलों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों की सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए माइक्रो प्लान तैयार किया है।
गर्भवती महिलाओं की मैपिंग पूरी
बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा जोखिम वाले लोगों में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक आशा और एएनएम के जरिए बाढ़ संभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग पूरी कर ली गई है। इसमें प्रत्येक महिला की संभावित प्रसव तिथि भी दर्ज की गई है। जिन महिलाओं का प्रसव बाढ़ के दौरान संभावित है, उन्हें बाढ़ आने से पहले नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सुरक्षित प्रसव गृह में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए आईसीडीएस और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ भी समन्वय किया जा रहा है।
बाढ़ में नाव पर डॉक्टर और दवाएं रहेंगी उपलब्ध
जलमग्न या दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों तक इलाज पहुंचाने के लिए बोट एम्बुलेंस और नौका औषधालय की व्यवस्था की गई है। इन नौकाओं पर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जरूरी जीवनरक्षक दवाएं और फर्स्ट-एड किट उपलब्ध रहेंगे। नौकाओं के अधिग्रहण, भाड़ा निर्धारण और परिचालन की व्यवस्था आपदा प्रबंधन विभाग तथा स्थानीय जिला प्रशासन के सहयोग से की जाएगी। इसके अलावा प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 102 एम्बुलेंस सेवा को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।
60 जरूरी दवाओं का बफर स्टॉक तैयार
बाढ़ संभावित जिलों में 60 मुख्य आवश्यक और जीवनरक्षक दवाओं तथा टीकों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध कराया गया है। यह व्यवस्था बीएमएसआईसीएल के माध्यम से मानक संचालन प्रक्रिया के तहत की गई है। बाढ़ के दौरान सर्पदंश की आशंका को देखते हुए एंटी-स्नेक वेनम (ASV) और कुत्ते या जहरीले जीवों के काटने की स्थिति के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है। इसके अलावा डायरिया और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए ओआरएस और जिंक टैबलेट, जबकि पेयजल को शुद्ध करने के लिए हैलाजोन गोलियों की व्यवस्था की गई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रमण और महामारी की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर और चूना भी उपलब्ध रहेगा। बुखार, जलजनित बीमारियों, त्वचा संक्रमण और चोट के इलाज के लिए पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स और जरूरी मलहम का स्टॉक भी रखा गया है।
राहत शिविरों के पास लगेंगे अस्थायी मेडिकल कैंप
बाढ़ के कारण लोगों के विस्थापित होने की स्थिति में राहत शिविरों और सामुदायिक रसोईघरों के पास अस्थायी चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की नियमित जांच की जाएगी। सामुदायिक रसोई स्थलों पर स्वच्छ भोजन और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी स्वास्थ्य संबंधी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे।
बाढ़ के बाद डायरिया, डेंगू और मलेरिया पर नजर
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ का पानी उतरने के बाद फैलने वाली बीमारियों को लेकर भी तैयारी की है। प्रभावित और जलजमाव वाले इलाकों में डायरिया, हैजा, त्वचा रोग, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव किया जाएगा। जिला स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था की लगातार निगरानी होगी और बीमारी फैलने की स्थिति में जरूरत के मुताबिक तत्काल चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई की जाएगी।
आपदा एजेंसियों के साथ रहेगा समन्वय
आपदा की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और आवश्यकता पड़ने पर थल सेना के साथ समन्वय करेगा। आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था के तहत एसडीआरएफ को प्रथम, एनडीआरएफ को द्वितीय और जरूरत पड़ने पर थल सेना को तृतीय रिस्पांस के रूप में समन्वित किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ को देखते हुए सभी तैयारियां समय पर पूरी की जाएं, ताकि आपात स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।




