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नशे के सौदागरों पर तगड़ा वार, जब्ती से गिरफ्तारी तक रिकॉर्ड कार्रवाई

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में नशीले पदार्थों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई के आंकड़े जारी किए गए हैं, जिसके तहत जब्ती, विनष्टिककरण और सजा के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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Patna: बिहार में नशीले पदार्थों और अवैध मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ राज्य सरकार ने अपना शिकंजा कस दिया है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (मुख्य सचिव कोषांग) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो द्वारा एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, प्रधान सचिव (गृह विभाग) पंकज कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) रत्न संजय और विशेष रूप से गृह विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

एनडीपीएस एक्ट के तहत ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां और जब्ती

बैठक में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में (सत्ताइस अक्टूबर तक) एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल चार हजार दो सौ बत्तीस मामले दर्ज किए गए हैं और छह हजार एक सौ चार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के कुल मामलों (दो हजार पांच सौ तिरासी) और गिरफ्तारियों (तीन हजार पांच सौ बासठ) की तुलना में काफी अधिक है। वर्ष 2023 से 27 अक्टूबर 2026 तक राज्य भर में कुल ग्यारह हजार तीन सौ सैंतालीस मामले दर्ज कर तेरह हजार पाँच सौ तैंतालीस अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

वर्ष 2026 के दौरान जप्त किए गए मादक पदार्थों में छियालीस हजार पांच सौ पचास दशमलव नौ पांच किलोग्राम गांजा, एक सौ उचास दशमलव छह नौ छह किलोग्राम हीरोइन/ब्राउन शुगर/स्मैक, ग्यारह लाख छप्पन हजार तीन सौ अस्सी नशीली गोलियां व कैप्सूल, चार लाख बानवे हजार आठ सौ सत्तर नशीले इंजेक्शन और पांच लाख ग्यारह हजार नौ सौ अट्ठासी बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप (CBCS) शामिल हैं। गांजा जब्ती के मामले में अररिया (दस हजार पाँच सौ तिहत्तर किग्रा), सुपौल (आठ हजार आठ सौ तेरह किग्रा) और मधुबनी (चार हजार चार सौ तिरासी किग्रा) शीर्ष जिले रहे, जबकि हीरोइन जब्ती में पटना (चौबीस दशमलव एक किग्रा) और पूर्णिया (बीस किग्रा) सबसे आगे रहे।

अफीम की खेती पर प्रहार और विनष्टिककरण

वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में बिहार पुलिस द्वारा जप्त मादक पदार्थों का विनष्टिककरण लगभग दस दशमलव एक गुना बढ़कर पच्चीस हजार दो सौ सैंतालीस किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसके अलावा, फसल वर्ष 2025-26 के दौरान अवैध अफीम की खेती के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सैंतीस मामलों में एक सौ अट्ठारह अभियुक्तों पर शिकंजा कसा गया और कुल पाँच सौ बारह दशमलव दो तीन पाँच एकड़ अवैध अफीम की फसल को नष्ट किया गया। अकेले गया जिले में पाँच सौ आठ दशमलव सात पाँच पाँच एकड़ क्षेत्र में फैली अवैध अफीम की फसल को नष्ट किया गया है।

राज्य में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए दस विशेष न्यायालय कार्यरत हैं, और वर्ष 2021 से अगस्त 2026 तक कुल एक हजार छः सौ बावन मामलों में दो हजार दो सौ पच्चीस अभियुक्तों को सजा दिलाई जा चुकी है। इसके साथ ही, आदतन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत एक सौ बत्तीस प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से तीन निरोध आदेश गृह विभाग द्वारा निर्गत किए जा चुके हैं। व्यावसायिक मात्रा के दो सौ इकतीस मामलों में चार सौ सत्रह अभियुक्तों की अवैध संपत्ति की वित्तीय जांच की प्रक्रिया भी जारी है।

‘नशा मुक्त बिहार अभियान’ और ‘ड्रग फ्री जोन’

मादक पदार्थों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए ‘मानस’ पोर्टल के माध्यम से तीन हजार सात सौ अठारह इनपुट प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक सौ अड़तीस प्राथमिकी दर्ज की गईं। जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए सत्ताइस अक्टूबर 2026 से छब्बीस नवंबर 2026 तक “नशा मुक्त बिहार अभियान 2026” का संचालन किया जा रहा है। साथ ही, सभी शैक्षणिक संस्थानों के पाँच सौ मीटर के दायरे को ‘ड्रग फ्री जोन’ घोषित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

बैठक के अंत में सीएम स्तर पर निरंतर समीक्षा, जिला स्तर पर नियमित मासिक एनकॉर्ड बैठकें आयोजित करने, सभी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में नशामुक्ति के लिए समर्पित वार्ड बनाने तथा पुलिस बल के लिए विशेष प्रशिक्षण और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सरकार के इन सख्त कदमों से न केवल तस्करों के नेटवर्क की कमर टूट रही है, बल्कि राज्य की युवा पीढ़ी का भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है।

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