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Patna: बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा विस्तार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य में पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन को मंजूरी प्रदान की गई। कैबिनेट बैठक में कुल 45 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनका असर शिक्षा, न्यायिक व्यवस्था, श्रम सुधार और आधारभूत संरचना विकास पर दिखाई देगा।
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कैबिनेट के फैसले के अनुसार मधुबनी में शांजा विश्वविद्यालय, नवादा के अशोक नगर में एसए विश्वविद्यालय, पटना में हिमालय विश्वविद्यालय, औरंगाबाद के जसोइया मोड़ में सीतयोग विश्वविद्यालय तथा सिवान में वीवी गिरी विश्वविद्यालय की स्थापना एवं संचालन की अनुमति दी गई है। सरकार का मानना है कि इन विश्वविद्यालयों के खुलने से राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे और शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) को भी मंजूरी दी गई। इस समझौते के तहत राष्ट्रीय महत्व के पुरातात्विक स्थलों और स्मारकों के जीर्णोद्धार, उन्नयन तथा रखरखाव का कार्य किया जाएगा। सरकार के अनुसार इससे ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण होगा और पर्यटन सुविधाओं का विकास भी संभव हो सकेगा।
न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। महाराजगंज (सिवान) में 10 कोर्ट भवन, एमेनिटी भवन और हाजत भवन के निर्माण के लिए 34.33 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मोतिहारी में 20 कोर्ट भवनों के निर्माण के लिए 53.02 करोड़ रुपये, बेगूसराय में 15 कोर्ट भवनों के लिए 39.04 करोड़ रुपये तथा रजौली (नवादा) में 10 कोर्ट भवन, एमेनिटी भवन और हाजत भवन निर्माण के लिए 38.38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
कैबिनेट ने श्रम क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों को भी मंजूरी प्रदान की है। औद्योगिक संबंध (बिहार) नियमावली, 2026, सामाजिक सुरक्षा (बिहार) नियमावली, उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा (बिहार) नियमावली तथा मजदूरी संहिता (बिहार) नियमावली, 2026 को स्वीकृति दी गई है। इन नियमों के लागू होने से श्रमिकों के अधिकारों और कार्यस्थल की सुरक्षा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग से जुड़े एक अहम निर्णय के तहत प्रारंभिक विद्यालय से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के स्थानांतरण को विनियमित करने के लिए “बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026” को भी मंजूरी दे दी गई है। इससे राज्य में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की संभावना है।
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इसके अलावा भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस कार्रवाई की घटना की न्यायिक जांच के लिए गठित आयोग को मंत्रिपरिषद ने घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की है। पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित यह आयोग मामले की जांच करेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही इस घटना की न्यायिक जांच की घोषणा कर चुके हैं।
बैठक में बिहार यात्रा भत्ता नियमावली, 1949 के नियम 69(2) को समाप्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। वहीं राज्य में ग्रीन फील्ड सैटलाइट टाउनशिप विकसित करने के लिए हडको के साथ एक लाख करोड़ रुपये के दीर्घकालिक ऋण हेतु एमओयू करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई है। सरकार का मानना है कि इससे शहरी विकास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।

