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Patna: बिहार सरकार ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि कर दी है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। इस फैसले के बाद बिहार में अब सप्तम केंद्रीय पुनरीक्षित वेतन संरचना के तहत काम कर रहे कर्मियों को 58 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत डीए दिया जाएगा।
केवल वर्तमान वेतनमान ही नहीं, बल्कि छठे वेतनमान वाले कर्मियों का भत्ता भी 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह पांचवे वेतनमान वाले कर्मचारियों का भत्ता 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत हो गया है। राहत की बात यह है कि यह बढ़ी हुई दरें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी। इस कैबिनेट बैठक में कुल 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य के पांच संवेदनशील जिलों—पूर्वी चम्पारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान में ‘पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण’ (Rural SP) के पांच नए पदों के सृजन का भी निर्णय लिया गया है।
औद्योगिक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने वैशाली जिले में अधिग्रहित की जा रही जमीन में से 100 एकड़ भूमि राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को निशुल्क देने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके अलावा, पर्यावरण की रक्षा के लिए ‘मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ को भी मंजूरी मिली है। इसका लक्ष्य साल 2030 तक कुल नए वाहनों की बिक्री में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की सुनिश्चित करना है, जिससे प्रदूषण कम हो और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलें।
बिहार को तकनीक के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए “बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन” की शुरुआत की गई है। इसके लिए सिंगापुर की संस्था ‘ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क’ के साथ मिलकर काम किया जाएगा। सरकार ने आर्यभट्ट दृष्टि परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 209 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भी आवंटित की है, ताकि राज्य में एआई (AI) और नवाचार का एक मजबूत ईकोसिस्टम तैयार किया जा सके।
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