Patna: बिहार सरकार के वित्त विभाग ने आगामी वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट प्राक्कलन और वर्ष 2026-27 के पुनरीक्षित बजट प्राक्कलन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को एक अहम राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की। गर्दनीबाग स्थित बापू सभागार में आयोजित इस बैठक में सभी विभागों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे 1 अक्टूबर 2026 तक अनिवार्य रूप से अपना बजट प्राक्कलन कंप्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफएमएस 2.0) पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड करें। इस दौरान अधिकारियों को पोर्टल के उपयोग को लेकर तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया।
बजट निर्माण के तकनीकी पहलुओं की दी गई जानकारी
कार्यशाला में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए अधिकारियों को बजट निर्माण की आधुनिक प्रक्रिया, नीतियों और तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया गया। सीएफएमएस 2.0 सॉफ्टवेयर के प्रशिक्षण सत्र में 15 अंकों के विपत्र कोड की सही संरचना समझाई गई। इसके अलावा राजस्व और पूंजीगत खातों के खर्चों के सटीक वर्गीकरण पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वित्तीय आंकड़ों में किसी भी तरह की विसंगति न रहे।
हरित और जेंडर बजट पर विशेष फोकस
राज्य में सतत विकास को गति देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया गया। इसके तहत विभागों को जेंडर बजट, बाल कल्याण और हरित बजट से जुड़े जरूरी डेटा और भौतिक लक्ष्यों की सही प्रविष्टि करने के तौर-तरीके सिखाए गए।
R&D बजट की नई शुरुआत और वित्तीय अनुशासन
राज्य में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए आगामी वित्तीय वर्ष से अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) बजट तैयार करने की नई पहल की जानकारी दी गई। वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महालेखाकार (एजी) कार्यालय के परामर्श का सख्ती से पालन करते हुए लघु शीर्ष-800 के उपयोग को पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया गया। साथ ही स्थानीय निकायों और विश्वविद्यालयों को मिलने वाले सहायक अनुदान के सही इस्तेमाल पर चर्चा हुई। कार्यशाला में सभी विभागों के बजट पदाधिकारी, आंतरिक वित्तीय सलाहकार और सहायक आंतरिक वित्तीय सलाहकार मौजूद रहे।



