रांची/चतरा : झारखंड के चतरा जिले के टंडवा स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में सजा काट रहे सुभान मियां को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने सुभान मियां की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत देने का आदेश दिया है।
सुभान मियां ने अदालत में साढ़े छह साल से अधिक समय जेल में बिताने का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत मंजूर कर ली।
12 दोषियों को सुनाई गई थी आठ से दस साल की सजा
इस मामले में 18 अगस्त को रांची की एनआईए विशेष अदालत ने 12 दोषियों को आठ से दस साल तक की जेल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा सभी पर 40 हजार से 90 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया था।
इससे पहले इसी मामले में सजा पाए सात अन्य दोषियों को भी झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। अब सुभान मियां को भी जमानत दे दी गई है।
2016 में टंडवा थाने में दर्ज हुआ था मामला
जानकारी के अनुसार, टेरर फंडिंग का यह मामला वर्ष 2016 में चतरा के टंडवा थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद 13 फरवरी 2018 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।
जांच पूरी होने के बाद एनआईए ने 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत में सुनवाई शुरू हुई थी।
कोयला ढुलाई के नाम पर उग्रवादियों को पैसे देने का आरोप
एनआईए की जांच के अनुसार, चतरा की मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं में कोयला ढुलाई के नाम पर उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति समिति (टीपीसी) को पैसे पहुंचाए जाते थे।
जांच एजेंसी का आरोप था कि कोयला ढुलाई के ठेके अधिक दरों पर लिए जाते थे, ताकि उससे मिलने वाली रकम का एक हिस्सा टीपीसी को लेवी के रूप में दिया जा सके।
इस मामले में सीसीएल, पुलिस, उग्रवादी संगठन और शांति समिति से जुड़े कुछ लोगों की कथित मिलीभगत की बात भी जांच में सामने आई थी। मामले में एनआईए ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था और विशेष अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई थी।



