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ISIS समर्थक राहुल सेन को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, जमानत याचिका हुई खारिज

रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले आरोपी ओमर बहादुर उर्फ राहुल सेन को तगड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की गंभीरता और आरोपित के आतंकी संबंधों को देखते हुए

हाईकोर्ट
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रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले आरोपी ओमर बहादुर उर्फ राहुल सेन को तगड़ा झटका दिया है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की गंभीरता और आरोपित के आतंकी संबंधों को देखते हुए उसकी जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी पर लगे आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं और ऐसे में उसे राहत नहीं दी जा सकती।

सोशल मीडिया बना था ‘जिहाद’ का हथियार

सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार दास और सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं। एनआईए की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ओमर बहादुर कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक डिजिटल प्रोपेगेंडा मशीन की तरह काम कर रहा था। वह यूट्यूब, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर आईएसआईएस की खूंखार विचारधारा को युवाओं के बीच परोस रहा था। उसका मुख्य काम न केवल जहर फैलाना था, बल्कि मासूम और गुमराह युवाओं को बरगलाकर उन्हें इस आतंकी संगठन का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करना भी था।

बाइक चोरी से आतंकी नेटवर्क तक का सफर

ओमर बहादुर के पकड़े जाने की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। शुरुआत में उसे मध्य प्रदेश पुलिस ने एक साधारण बाइक चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन जब एनआईए ने लोहरदगा के फैजल अंसारी के आतंकी संपर्कों की परतें उधेड़नी शुरू कीं, तो राहुल सेन उर्फ ओमर बहादुर का नाम भी सामने आया।

जांच में पता चला कि फैजल अंसारी न केवल आईएसआईएस से सीधे तौर पर जुड़ा था, बल्कि उसके कई बैंक खातों का इस्तेमाल संदिग्ध और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा था। फैजल अंसारी की जमानत भी झारखंड हाईकोर्ट पहले ही दो बार खारिज कर चुका है।

अंतिम चरण में है कानूनी शिकंजा

एनआईए ने इस मामले में RC 2/23/NIA/RNC के तहत मामला दर्ज किया है। निचली अदालत में केस की कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ रही है। अब तक 39 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, जो आरोपी की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे हैं। जिस तरह से डिजिटल फुटप्रिंट्स और गवाहों के बयान सामने आ रहे हैं, ओमर बहादुर के लिए कानून के शिकंजे से निकलना अब लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है।

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