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सड़क चौड़ीकरण पर छाया राजनीति, भुइयांडीह में बेघर परिवारों का हल्ला

Jamshedpur News: सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के छाया नगर और भुइयांडीह को श्मशान घाट से मानगो तक जोड़ने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन और टाटा स्टील की संयुक्त टीम लगातार

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Jamshedpur News: सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के छाया नगर और भुइयांडीह को श्मशान घाट से मानगो तक जोड़ने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सड़क चौड़ीकरण के लिए जिला प्रशासन और टाटा स्टील की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। इस दौरान करीब 60 कच्चे-पक्के घर और दुकानों को ढहा दिया गया है, जिससे अनेक परिवार जहां-तहां सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर हो गए हैं। कड़ाके की ठंड में बेघर हुए लोग अपनी आपबीती लेकर अब सड़कों पर उतर आए हैं।

विस्थापन के दर्द के बीच शुक्रवार देर रात लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में मसाल जुलूस निकाला। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में प्रभावित लोग शामिल हुए। भाजपा के बागी नेता एवं ठेकेदार शिवशंकर सिंह और पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां लोगों के समर्थन में मौजूद रहे। शिवशंकर सिंह ने बेघर हुए परिवारों के बीच कंबल और राहत सामग्री वितरित की। वहीं दुलाल भुइयां ने प्रशासनिक कदम को अमानवीय बताते हुए आंदोलन को जारी रखने की बात कही।

उधर, क्षेत्र की विधायिका पूर्णिमा साहू ने अपनी भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण प्रक्रिया दो वर्ष से जारी है और सोशल मीडिया में उनके नाम पर गलत दावे किए जा रहे हैं कि उन्होंने घर तोड़वाने में भूमिका निभाई है। विधायक ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से मुलाकात कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगाने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग रखी है।

राजनीतिक दलों की ओर से भी आवाजें उठने लगी हैं कि जब तक विस्थापितों के पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं होती, तब तक तोड़फोड़ बंद की जानी चाहिए। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भुइयांडीह क्षेत्र को अवैध रूप से बसाने में कभी पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां की अहम भूमिका रही थी और अब राजनीतिक जमीन कमजोर पड़ने के बाद वे इस मुद्दे के सहारे खुद को पुनः स्थापित करने की कोशिश में जुट गए हैं।

सड़क चौड़ीकरण की जरूरत और मानवीय संवेदनाओं के बीच इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक ओर शहर विकास की मजबूरी है, तो दूसरी ओर सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे डेरा डाले परिवार—समस्या और राजनीति की यह जंग फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही।

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