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भागलपुर फेरी सेवा: 45 मिनट का दावा फेल, 2 घंटे में पहुंचा पहला जहाज

विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर में शुरू हुई वैकल्पिक फेरी सेवा पहले ही दिन लड़खड़ा गई। 45 मिनट के दावे के उलट जहाज सवा दो घंटे में पहुंचा और संपर्क पथ भी जलमग्न मिला।
भागलपुर फेरी सेवा बियाड़ा घाट जहान्वी चौक
बियाड़ा घाट से जहान्वी चौक पहुंची वैकल्पिक फेरी सेवा

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Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का आवागमन बंद होने के बाद गंगा पार कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा शुरू की गई वैकल्पिक फेरी सेवा पहले ही दिन हांफ गई। गंगा के बढ़ते जलस्तर, तेज बहाव और जमीनी स्तर पर अधूरी तैयारियों ने सफर कर रहे सैकड़ों मुसाफिरों की परेशानी बढ़ा दी। बरारी औद्योगिक क्षेत्र स्थित बियाड़ा घाट से सुबह 6:28 बजे रवाना हुआ पहला बड़ा जहाज ‘स्वामी परमहंस’ करीब 2 घंटे 7 मिनट का लंबा समय लेकर नवगछिया की ओर जहान्वी चौक घाट पहुंचा। प्रशासन ने बड़े वेसल के जरिए 45 मिनट से एक घंटे में सफर पूरा कराने का दावा किया था, जो पहले ही फेरे में धराशायी हो गया।

2 घंटे खड़े-खड़े सफर, उतरते ही जलमग्न मिला रास्ता

जहाज जब सवा दो घंटे बाद जहान्वी चौक घाट पहुंचा, तो यात्रियों की मुसीबतें कम होने की बजाय और बढ़ गईं। गंगा के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि के कारण घाट से मुख्य सड़क को जोड़ने वाला संपर्क पथ कई जगहों पर पूरी तरह पानी में डूब चुका था। इसके चलते जहाज से उतरने के बाद यात्रियों को गंदे पानी और गहरे कीचड़ के बीच से पैदल चलकर मुख्य सड़क तक जाना पड़ा। वहीं, जहाज के भीतर यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियों या बेंचों की व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण अधिकांश मुसाफिरों को खड़े होकर ही पूरा सफर तय करना पड़ा।

तेज धूप और उमस से बढ़ेंगी दिक्कतें

यात्रियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले ही फेरे में तय समय से दोगुना वक्त लग गया। घाटों पर शेड और बैठने के पुख्ता इंतजाम न होने से आने वाले समय में परेशानी और बढ़ेगी। खासकर दिन चढ़ने के साथ तेज धूप और उमस के बीच बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए यह सफर बेहद कष्टकारी साबित होगा। यात्रियों ने मांग की है कि जहाजों के फेरे बढ़ाने के साथ-साथ दोनों घाटों पर पक्के रैंप, शेड और बैठने की तत्काल मुकम्मल व्यवस्था की जाए।

युद्धस्तर पर संपर्क पथ को ऊंचा करने में जुटी टीम

जहान्वी चौक घाट पर जलभराव और रास्ता कटने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की तकनीकी टीम मौके पर सक्रिय हुई। संपर्क पथ को पानी के कटाव से बचाने और आवागमन सुचारू करने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया गया है। रास्ते पर बालू, मिट्टी और जियो बैग डालकर उसे ऊंचा किया जा रहा है ताकि यात्रियों को पानी में न उतरना पड़े। तकनीकी दल का कहना है कि जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सेवा को व्यवस्थित किया जा रहा है।

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