Health Desk: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के बीच लोग अपनी नींद के साथ सबसे ज्यादा समझौता करते हैं। आमतौर पर डॉक्टर्स हर दिन 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं, लेकिन हालिया रिसर्च में सामने आया है कि केवल घंटों की गिनती पूरी कर लेना ही सेहत के लिए काफी नहीं है। नींद लेने का सटीक समय भी उतना ही मायने रखता है। स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञों के मुताबिक, हमारे शरीर के भीतर एक कुदरती आंतरिक घड़ी होती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘सर्कैडियन रिदम’ (Circadian Rhythm) कहा जाता है। यह जैविक घड़ी ही हमारे शरीर को एक तय वक्त पर सोने और जागने का इशारा करती है।

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ज्यादातर इंसानों के लिए यह प्राकृतिक चक्र रात को करीब 11 बजे से सुबह 7 बजे के बीच की नींद को सबसे सेहतमंद और उपयुक्त मानता है। यदि कोई शख्स लगातार इस तय समय सीमा को छोड़कर किसी भी वक्त सोता है, तो उसकी अंदरूनी जैविक घड़ी पूरी तरह गड़बड़ा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्कैडियन रिदम सिर्फ नींद को ही कंट्रोल नहीं करती, बल्कि शरीर में हार्मोन्स के उतार-चढ़ाव, बॉडी टेम्परेचर, एनर्जी लेवल और डैमेज सेल्स की मरम्मत (कोशिकाओं की रिपेयरिंग) जैसी कई बेहद जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं को भी संभालती है। ऐसे में अगर कोई इंसान देर रात 2 या 3 बजे सोता है और दिन में अपने 8 घंटे पूरे कर भी लेता है, तब भी उसके शरीर का नेचुरल सिस्टम डिस्टर्ब रहता है।

देर से सोने से शरीर पर होते हैं ये खतरनाक असर

लगातार देर रात तक जागने और सुबह देर से उठने की आदत सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, इससे दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। इसके साथ ही शरीर की इंसुलिन को पचाने की क्षमता कम होने लगती है, जिससे आगे चलकर डायबिटीज (मधुमेह) होने का डर रहता है। कई बड़े शोध बताते हैं कि गलत समय पर सोने से शरीर के कई जरूरी जीनों की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। इतना ही नहीं, यह आदत मानसिक सेहत को भी खोखला करती है, जिससे डिप्रेशन, तनाव और एंग्जायटी जैसी दिक्कतें घेर लेती हैं।

नींद का ढर्रा सुधारने के आसान और अचूक उपाय

विशेषज्ञों ने स्लीप साइकल को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कुछ बेहद सरल तरीके सुझाए हैं:

  • सुबह की धूप: सुबह सोकर उठने के एक से दो घंटे के अंदर कम से कम 30 मिनट तक प्राकृतिक धूप में बैठें। यह रोशनी आपकी जैविक घड़ी को दोबारा रीसेट करने का काम करती है।

  • लाइट्स करें डिम: रात को सोने के तय समय से दो-तीन घंटे पहले ही अपने घर की तेज लाइटों को बंद या धीमा कर दें, ताकि आपके दिमाग को आराम करने का सिग्नल मिल सके।

  • फिक्स टाइमिंग: रोज एक ही तय वक्त पर सोएं और जागें। सबसे जरूरी बात यह है कि वीकेंड (शनिवार-रविवार) को भी अपने जागने का समय बिल्कुल न बदलें।

याद रखें, एक तंदुरुस्त जीवन के लिए जितना जरूरी अच्छा खान-पान और एक्सरसाइज है, उतनी ही जरूरी सही समय पर ली गई सुकून की नींद है। जब हम सही समय पर सोते हैं, तब हमारा शरीर अंदरूनी टूट-फूट को ठीक करता है और दिमाग दिनभर के तनाव को व्यवस्थित कर तरोताजा होता है।

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