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प्रोजेक्ट टीम का कमाल : रांची ने छीना टॉपर का ताज, पिछले साल की कसर इस बार पूरी

रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा घोषित कक्षा 8वीं के बोर्ड नतीजों में राजधानी रांची ने अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता का लोहा मनवाया है। रांची जिला पूरे प्रदेश में 96.8 प्रतिशत की शानदार पासिंग रेट के साथ प्रथम स्थान पर रहा है। यह सफलता इसलिए भी

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रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा घोषित कक्षा 8वीं के बोर्ड नतीजों में राजधानी रांची ने अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता का लोहा मनवाया है। रांची जिला पूरे प्रदेश में 96.8 प्रतिशत की शानदार पासिंग रेट के साथ प्रथम स्थान पर रहा है। यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले साल रांची दूसरे पायदान पर था, लेकिन इस बार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की सुनियोजित रणनीति ने इसे ‘चैंपियन’ बना दिया।

‘प्रोजेक्ट टीम’ बनी रांची की सफलता का आधार

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट टीम’ की कड़ी मेहनत छिपी है। जब अन्य जिले सामान्य तरीके से पढ़ाई कर रहे थे, तब रांची की प्रोजेक्ट टीम ने एक-एक छात्र की प्रगति का रोडमैप तैयार किया। इस टीम ने न केवल स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधारा, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि कोई भी बच्चा कक्षा से अनुपस्थित न रहे।

रणनीति जिसने पलटा पासा

रांची की इस जीत के पीछे चार बड़े स्तंभ रहे:

प्री-बोर्ड का दांव: जनवरी के कड़कड़ाती ठंड में जब सत्र खत्म होने को था, तब सभी छात्रों के लिए प्री-बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की गईं ताकि उनकी कमियों को समय रहते पकड़ा जा सके।

कमजोर छात्रों पर फोकस: परीक्षा परिणामों के सूक्ष्म विश्लेषण के बाद उन छात्रों की पहचान की गई जो पढ़ाई में पिछड़ रहे थे। उनके लिए विशेष कक्षाएं (Remedial Classes) लगाई गईं।

अभ्यास का अंबार: छात्रों के मन से परीक्षा का डर निकालने के लिए तीन पूर्व अभ्यास परीक्षाएं और एक फाइनल ‘मॉक टेस्ट’ कराया गया। इससे छात्र बोर्ड परीक्षा के पैटर्न से पूरी तरह वाकिफ हो गए।

सख्त निगरानी: जिला शिक्षा अधीक्षक और उनकी टीम ने ब्लॉक स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की, जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

आत्मविश्वास से लबरेज दिखे छात्र

इन व्यवस्थित प्रयासों का असर यह हुआ कि छात्र न केवल किताबी ज्ञान में निपुण हुए, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर पहुंच गया। जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सामूहिक प्रयास की जीत है। अबुआ साथी हेल्पलाइन और जिला प्रशासन के इस मॉडल की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। इस उपलब्धि से जिले के शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों में हर्ष का माहौल है।

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