रांची: झारखंड के प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए विधानसभा के बजट सत्र से एक बेहद सुखद खबर निकलकर सामने आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की नियुक्तियों में उम्र सीमा की ‘कट-ऑफ डेट’ को लेकर बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है, जो समय पर परीक्षा न होने के कारण आयु सीमा से बाहर हो रहे थे।
अब 2026 नहीं, 2022 होगा आधार
मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि जेपीएससी की आगामी 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के लिए आयु की गणना अब 1 अगस्त 2026 के बजाय 1 अगस्त 2022 के आधार पर की जाएगी। तकनीकी रूप से इसका मतलब यह है कि अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में सीधे तौर पर 4 साल की बड़ी छूट मिल गई है। इससे पहले चर्चा थी कि कार्मिक विभाग केवल 3 साल की छूट का प्रस्ताव दे रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों की मांग को देखते हुए इसे बढ़ाकर 4 साल कर दिया।
किसे कितना मिलेगा लाभ?
इस नए बदलाव के बाद अब सामान्य वर्ग (General Category) के अभ्यर्थी 38 वर्ष की आयु तक परीक्षा में बैठ सकेंगे। वहीं, आरक्षित वर्ग और दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनके नियमानुसार मिलने वाली छूट के ऊपर यह अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त होगा।
क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
दरअसल, झारखंड में सिविल सेवा परीक्षाएं नियमित रूप से आयोजित नहीं हो पाती हैं। इसी विसंगति के कारण कई प्रतिभाशाली युवा बिना एक भी मौका मिले परीक्षा की दौड़ से बाहर हो रहे थे। विधायकों और छात्र संगठनों ने लगातार सरकार पर दबाव बनाया था कि परीक्षा के अंतराल को देखते हुए आयु सीमा में ढील दी जाए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस फैसले को आगामी चुनावों और युवाओं के बीच उनकी पकड़ मजबूत करने के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। अब अभ्यर्थी नए सिरे से अपनी तैयारी में जुट सकते हैं, क्योंकि प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में अब और देरी नहीं की जाएगी।



