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धरती हिली, जिंदगी थमी: अफगानिस्तान में 250 से ज्यादा मौ’तें, हाहाकार

World News: अफगानिस्तान एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। बीती रात यहां 6.0 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसने कई जिलों को बुरी तरह हिला दिया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और

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World News: अफगानिस्तान एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। बीती रात यहां 6.0 तीव्रता का भीषण भूकंप आया, जिसने कई जिलों को बुरी तरह हिला दिया। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि जैसे-जैसे मलबा हटाने का काम आगे बढ़ेगा, मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

भूकंप का केंद्र कुनर प्रांत के हिंदू कुश क्षेत्र में था और यह जमीन से महज 8 किलोमीटर की गहराई पर आया। इस वजह से झटके बेहद खतरनाक साबित हुए। नूरगल, सूकी, वतपुर, मानोगी और चपे-दरे जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिनमें घरों का मलबा, रोते-बिलखते लोग और घायल नागरिकों को बाहर निकालते ग्रामीण साफ दिख रहे हैं।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों और टूटी सड़कों की वजह से राहत और बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो रहा है। कई गांवों तक राहत टीमें अब तक नहीं पहुंच पाई हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल मदद की अपील की है। तालिबान प्रशासन ने कहा है कि उन्हें हेलिकॉप्टर और मेडिकल टीम की सख्त जरूरत है, क्योंकि सड़क मार्ग से पहुंचना लगभग नामुमकिन है।

भूकंप के बाद प्रभावित जिलों में चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण हर किसी तक मदद पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया है। कई परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं और अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। पानी और भोजन की भारी कमी हो गई है, जिससे हालात और बिगड़ने का खतरा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंदू कुश इलाका भूकंप प्रवण है, क्योंकि यहां यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं। इसी वजह से यहां बार-बार बड़े भूकंप आते रहते हैं। 2023 में आया 6.3 तीव्रता का भूकंप भी अफगानिस्तान के लिए बेहद घातक साबित हुआ था।

संयुक्त राष्ट्र और कई मानवीय संगठन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की टीम जल्द ही प्रभावित इलाकों का दौरा करेगी और राहत सामग्री भेजे जाने की तैयारी की जा रही है। इस त्रासदी ने अफगानिस्तान की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय मदद से उनकी जिंदगी पटरी पर लौट पाएगी।

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