गुमला/चैनपुर: झारखंड सरकार के वित्त विभाग के अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी (भाप्रसे) ने शुक्रवार को चैनपुर प्रखंड के उपर डुमरी गांव का भ्रमण कर सामुदायिक वन अधिकार (Community Forest Rights) के तहत किए जा रहे कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों, वनाधिकार समिति के सदस्यों एवं संबंधित अधिकारियों से संवाद कर सामुदायिक वन अधिकार पट्टा मिलने के बाद आजीविका संवर्धन, वन संरक्षण तथा सामुदायिक वन संसाधनों के प्रबंधन की स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

भ्रमण के दौरान अपर सचिव ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुए सामुदायिक वन अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन, वन आधारित रोजगार के अवसरों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। उन्होंने ग्रामीणों से उनकी वर्तमान आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों, सामने आ रही चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी ली।

अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार केवल वन भूमि के उपयोग का अधिकार नहीं, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण सामूहिक भागीदारी के साथ वन संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन करेंगे, तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी मजबूत होगी।

उन्होंने समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल देते हुए कहा कि वन संरक्षण और सतत विकास के लिए स्थानीय लोगों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार भी इस दिशा में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से समुदायों को सहयोग प्रदान कर रही है, ताकि वन आधारित आजीविका को बढ़ावा मिल सके और प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन, फिया फाउंडेशन के प्रतिनिधि ललित महतो, बारीडीह पंचायत के मुखिया, वनाधिकार समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने सामुदायिक वन अधिकार के बेहतर क्रियान्वयन और वन संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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