रांची : राजधानी में नगर निगम ने नक्शा विचलन और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ एक बार फिर सख्त तेवर अपनाए हैं। कचहरी रोड स्थित रांची नगर निगम के न्यायालय कोषांग ने जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के हवाई नगर स्थित ‘तपोवन रेसिडेंशियल इस्टेट’ से जुड़े मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। नगर आयुक्त की अदालत ने बिल्डर सहित अपार्टमेंट के कुल 22 फ्लैट धारकों को कोर्ट नोटिस तामील करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित तिथि पर वे अपना पक्ष रखने उपस्थित नहीं हुए, तो मामले में एकपक्षीय कानूनी फैसला ले लिया जाएगा।
बिल्डर व 22 फ्लैट धारक बनाए गए प्रतिवादी
न्यायालय नगर आयुक्त के समक्ष दर्ज अनधिकृत निर्माण वाद (U.C. Case No. – 60-A/2025) में वादी रोहित सिन्हा (पिता—पंकज कुमार सिन्हा) द्वारा दायर परिवाद के आधार पर यह कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। मामले में मुख्य प्रतिवादी के रूप में यामिनी ज्योति (बिल्डर, मे० गणपति कंस्ट्रक्शन) के साथ-साथ तपोवन रेसिडेंशियल इस्टेट (रोड नंबर- 02, पो०- हटिया, वार्ड संख्या- 50, थाना- जगन्नाथपुर, हवाई नगर, रांची) के ए-ब्लॉक, बी-ब्लॉक और सी-ब्लॉक के विभिन्न फ्लैटों में रहने वाले 22 निवासियों को प्रतिवादी नामित किया गया है। नोटिस में फ्लैट नंबर 101 से 409 तक के कई स्वामियों सहित मारथोमा एजुकेशनल सोसायटी (सेंट थॉमस स्कूल) का नाम भी शामिल है।
10 दिसंबर को साक्ष्य के साथ पेश होने की अंतिम मोहलत
सहायक नगर आयुक्त द्वारा जारी पत्रांक संख्या 685 के माध्यम से सभी नामित प्रतिवादियों को अंतिम ताकीद दी गई है कि वे आगामी 10 दिसंबर 2026 को दोपहर 1 बजे नगर आयुक्त के न्यायालय में उपस्थित हों। वे स्वयं सशरीर अथवा अपने विधिवत प्राधिकृत अधिवक्ता के जरिए पेश होकर कारण पृच्छा (कारण बताओ) सहित अपना लिखित पक्ष और प्रासंगिक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। अदालत ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सुनवाई की तारीख पर प्रतिवादियों की गैरहाजिरी रहने पर वादी के साक्ष्यों के आधार पर एकपक्षीय आदेश सुना दिया जाएगा।
अपार्टमेंट निवासियों में हलचल, नियमों के उल्लंघन पर नजर
नगर निगम के इस नोटिस के बाद तपोवन रेसिडेंशियल इस्टेट के निवासियों और बिल्डर महकमे में हलचल तेज हो गई है। नगर निगम का स्पष्ट कहना है कि स्वीकृत नक्शे के विपरीत अतिरिक्त निर्माण, सेटबैक उल्लंघन या अवैध विस्तार करने वालों के खिलाफ नगर पालिका अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जानकारों का मानना है कि यदि संतोषजनक जवाब या वैध स्वीकृति पत्र प्रस्तुत नहीं किए गए, तो संबंधित निर्माण को सील करने अथवा ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।





