लोहरदगा: झारखंड के लोहरदगा जिले में मछली पालन से जुड़े किसानों की आमदनी बढ़ाने और मत्स्य उत्पादन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए मत्स्य विभाग ने दो अहम कल्याणकारी योजनाओं के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। जिला मत्स्य पदाधिकारी-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, लोहरदगा द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, जिले के प्रगतिशील मत्स्य पालकों को पुरस्कृत करने के साथ-साथ तालाबों में गुणवत्तापूर्ण मछली बीज डालने के लिए भारी अनुदान दिया जा रहा है।
उत्कृष्ट काम करने वाले किसानों को ₹30,000 की प्रोत्साहन राशि कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (मत्स्य प्रभाग) के मत्स्य प्रसार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण योजना (वर्ष 2026-27) के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले मत्स्य कृषकों, बीज उत्पादकों और हैचरी संचालकों को सम्मानित किया जाएगा। चयनित किसानों को अधिकतम 30,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस राशि का उपयोग किसान तालाब में ऑक्सीजन बढ़ाने वाले आधुनिक ‘पैडल व्हील एरेटर’ (12 Paddle Wheel Aerator), मत्स्य बीज पैकेजिंग के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर (एक्सेसरीज सहित) अथवा आइस बॉक्स युक्त दोपहिया वाहन की खरीद के लिए कर सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से लैस करना है, जिससे मछलियों की मृत्यु दर कम हो और बाजार तक ताजा मछली पहुंच सके।
मत्स्य अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) की खरीद पर 50% सरकारी अनुदान जिले में निजी क्षेत्र के तालाबों के साथ-साथ बंदोबस्त व सरकारी तालाबों में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष योजना चलाई जा रही है। जिन प्रशिक्षित मत्स्य पालकों के पास 1.00 एकड़ या उससे बड़े जलक्षेत्र के सदाबहार तालाब उपलब्ध हैं, उन्हें स्थानीय स्तर पर उत्पादित मत्स्य अंगुलिकाओं (फिंगरलिंग्स) के क्रय पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 1875 रुपये प्रति एकड़ (लगभग 5000 बीज प्रति एकड़ की दर से) का अनुदान दिया जाएगा। अंगुलिकाओं की खरीद जिला मत्स्य कार्यालय से संबद्ध पंजीकृत बीज उत्पादकों से की जाएगी। विभागीय प्रशिक्षण प्राप्त किसानों और चालू वित्तीय वर्ष में झास्कोफिश अथवा विभागीय फिश फीड का उपयोग करने वाले किसानों को इस योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, विभाग से स्पॉन प्राप्त करने वाले बीज उत्पादक व उनके परिवार इस लाभ के दायरे में नहीं आएंगे।
आवेदन प्रक्रिया, पात्रता और अंतिम तिथि बीज अनुदान योजना में पहले पर्याप्त आवेदन न मिलने के कारण विभाग ने दोबारा आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह योजना ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर संचालित होगी। आवेदन के साथ किसानों को तालाबों की सूची, नाम, पता, मोबाइल नंबर, तालाब का क्षेत्रफल, तालाब की जियो-टैग फोटो (अक्षांश-देशांतर/Latitude-Longitude सहित) और मत्स्य पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र की स्व-प्रमाणित प्रति संलग्न करनी होगी। चयन सुरक्षित जमा निर्धारण समिति द्वारा किया जाएगा।
दोनों ही योजनाओं के लिए आवेदन प्रपत्र जिला मत्स्य कार्यालय, लोहरदगा से कार्यालय अवधि में निःशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर 2026 (शाम 5 बजे तक) निर्धारित की गई है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का प्रावधान लागू होता है, तो उसके तहत भी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।







