Career Adda: कागजों पर भले ही मेडिकल का मतलब एलोपैथी की लंबी डिग्रियां और बड़े अस्पतालों की चमक-दमक लगती हो, लेकिन जमीनी हकीकत तेजी से बदल रही है। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक, लोग अब क्रोनिक बीमारियों से स्थायी राहत के लिए होम्योपैथी का रुख कर रहे हैं।
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दिलचस्प बात यह है कि आजकल होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति की ओर लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। इन दवाओं के कोई दुष्प्रभाव नहीं होने के कारण दुनिया भर में होम्योपैथिक डॉक्टरों की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है। इसके चलते इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों की तादाद में भी इज़ाफ़ा हो रहा है। ऐसे में जो छात्र होम्योपैथिक डॉक्टर बनना चाहते हैं, उनके लिए रोजगार और शिक्षा के नए अवसर भी खुलते जा रहे हैं। इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए छात्रों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा।
योग्यता और पात्रता के मानदंड
होम्योपैथी कोर्स में प्रवेश पाने की चाहत रखने वाले छात्रों के लिए कुछ शैक्षणिक और आयु सीमा तय की गई है:
छात्रों को विज्ञान विषय से 12वीं कक्षा पास करना अनिवार्य है।
12वीं कक्षा में सामान्य वर्ग के छात्रों के कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए, जबकि आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए 45 प्रतिशत अंक होना जरूरी है।
छात्र की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए।
इसके अलावा छात्र का नीट (NEET) परीक्षा क्वालीफाई होना आवश्यक है। बता दें कि होम्योपैथी पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए कई संस्थान अपनी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते हैं, वहीं अधिकांश संस्थान नीट के स्कोर के आधार पर ही दाखिला देते हैं।
विभिन्न प्रकार के कोर्स और उनकी अवधि
होम्योपैथी के क्षेत्र में शिक्षा के कई स्तर उपलब्ध हैं, जिन्हें छात्र अपनी रुचि के अनुसार चुन सकते हैं:
सर्टिफिकेट कोर्सेज: होम्योपैथिक शिक्षा के तहत तमाम तरह के सर्टिफिकेट कोर्स भी करवाए जाते हैं, जिनकी अवधि 3 से 6 महीने की होती है।
डिप्लोमा कोर्स: होम्योपैथी में कई प्रकार के अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स कराए जाते हैं। इनमें डिप्लोमा इन इलेक्ट्रो होम्योपैथी मेडिसिन और डिप्लोमा इन होम्योपैथी एंड मेडिसिन प्रमुख हैं। इन कोर्सेज की अवधि 1 से 2 वर्ष तक होती है।
स्नातक (UG) कोर्सेज: स्नातक स्तर पर होम्योपैथिक कोर्स करने के लिए छात्र बीएचएमएस (BHMS) और बीईएमएस (BEMS) जैसे पाठ्यक्रम चुन सकते हैं। इस कोर्स की अवधि 3 से 5 साल की होती है।
बीएचएमएस कोर्स की रूपरेखा
बीएचएमएस यानी बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) एक प्रमुख कोर्स है। इस पाठ्यक्रम में बायोलॉजी, शरीर विज्ञान और चिकित्सा की तमाम शाखाओं पर बुनियादी और उन्नत ज्ञान दिया जाता है। साथ ही छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने वाले कई विषय पढ़ाए जाते हैं। डिग्री प्राप्त करने से पहले हर छात्र को 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होती है।
करियर और रोजगार के अवसर
होम्योपैथी के क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। होम्योपैथिक दवाइयों का कोई साइड-इफेक्ट नहीं होता, इसलिए बहुत सारे लोग आज इस इलाज पद्धति पर गहरा भरोसा जताते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक पर ये दवाएं समान रूप से असर करती हैं।
इन दवाइयों का इस्तेमाल माइग्रेन, अवसाद, क्रोनिक थकान सिंड्रोम, रूमेटोइड गठिया, एलर्जी, सर्दी-खांसी, चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम और प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम जैसी कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है। छात्र यह डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों और अनुसंधान केंद्रों में काम कर अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं।







