रायडीह (गुमला): रायडीह प्रखंड अंतर्गत कोबजा गांव में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लेते हुए इलाके में ईसाई धर्म के पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत गांव में स्थायी बैनर और पोस्टर भी लगाए गए हैं।
कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष और आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए।कार्यक्रम में शामिल सरना समुदाय की सामाजिक नेत्री निशा उरांव ने कहा कि आदिवासियों का धर्मांतरण आज पूरे सरना समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने बताया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां पेशा कानून लागू है।
पेशा कानून के तहत ग्राम सभा को विशेष अधिकार प्राप्त हैं। इन्ही अधिकारों का उपयोग करते हुए गांव में पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक का यह निर्णय लिया गया है। ग्रामीणों के साथ मिलकर न केवल चेतावनी बोर्ड लगाए गए, बल्कि यह शपथ भी ली गई कि गांव में किसी भी ईसाई धर्म गुरु को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
गांव के सरना समुदाय के बिशु उरांव और अन्य ग्रामीण महिलाओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगातार धर्मांतरण की घटनाएं हो रही हैं, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपराएं खतरे में पड़ रही हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गांव में अवैध रूप से चर्च बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे उनका अस्तित्व समाप्त होने का भय है।






