रांची: झारखंड की अनमोल जनजातीय सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी लोक परंपराओं को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (TRI), रांची ने राज्य के पांच प्रमुख जनजातीय समुदायों के पारंपरिक संगीत और नृत्यों के ऑडियो-विजुअल दस्तावेजीकरण (Audio-Visual Documentation) और सजीव प्रस्तुतियों (Live Performance Coordination) के लिए आधिकारिक कोटेशन आमंत्रित किए हैं।
कल्याण विभाग के अंतर्गत जारी इस अधिसूचना के तहत संथाल, उरांव, मुंडा, हो और खड़िया जनजातियों की सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक डिजिटल स्वरूप में संरक्षित किया जाएगा। संस्थान ने इस कार्य के लिए जनजातीय अनुसंधान, लोक-संगीतशास्त्र (Ethnomusicology), सांस्कृतिक अध्ययन और ऑडियो-विजुअल डाक्यूमेंटेशन के क्षेत्र में अनुभवी पंजीकृत एजेंसियों तथा स्वतंत्र विशेषज्ञों से प्रस्ताव मांगे हैं।
परियोजना का दायरा और प्रमुख शर्तें
इस परियोजना के अंतर्गत चयनित एजेंसी या विशेषज्ञ को प्रत्येक जनजातीय समुदाय के कम से कम 5 पारंपरिक नृत्य रूपों (कुल न्यूनतम 25 नृत्य रूप) का संपूर्ण गीत सहित प्राकृतिक परिवेश में दस्तावेजीकरण करना होगा। इसमें पारंपरिक परिधान, आभूषण और वाद्ययंत्रों का मूल स्वरूप अनिवार्य रहेगा। इसके साथ ही संरचित 6-बिंदु पाठ्य सामग्री तैयार करनी होगी और रांची स्थित टीआरआई परिसर में प्रत्येक समुदाय के कलाकारों द्वारा लाइव प्रदर्शन का समन्वय भी करना होगा।
इस पूरी परियोजना की अधिकतम लागत 8,00,000 रुपये (आठ लाख रुपये मात्र) निर्धारित की गई है, जिसमें सभी लागू कर शामिल हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कार्य के लिए कोई अग्रिम भुगतान नहीं किया जाएगा। कार्य आवंटन के बाद परियोजना को 120 दिनों की तय समयावधि के भीतर पूरा करना होगा।
आवेदन की अंतिम तिथि और संपर्क
इच्छुक पेशेवर व संस्थाएं 10 नवंबर 2026 की शाम 5 बजे तक अपने प्रस्ताव जमा कर सकते हैं। विस्तृत नियम, पात्रता शर्तें और आवेदन प्रारूप संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट (https://www.trijharkhand.in/en/opportunities) पर उपलब्ध हैं। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए संस्थान के दूरभाष (0651-2551824) अथवा आधिकारिक ईमेल (tri.directorate@gmail.com) पर संपर्क किया जा सकता है।




