Tel Aviv: इजरायल के हालिया चुनाव में अरब पार्टियों के शानदार प्रदर्शन ने देश का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। संसद में जॉइंट लिस्ट और राम पार्टी को करीब 19 सीटें मिलने का अनुमान है, जो उनके मौजूदा प्रतिनिधित्व से लगभग दोगुना है। यह बढ़त उन्हें सरकार गठन में निर्णायक भूमिका दिलाने के लिए तैयार कर रही है, जिससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
अरब पार्टियों की नई राजनीतिक रणनीति
चुनाव परिणामों के अनुसार, युसूफ जबरीन के नेतृत्व वाले जॉइंट लिस्ट गठबंधन को लगभग 12 सीटें मिलने की उम्मीद है, जबकि मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली राम पार्टी भी बेहद मजबूत स्थिति में है। जबरीन ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए आइजनकोट के राजनीतिक गठबंधन को बाहर से समर्थन दे सकती है, हालांकि गाजा और लेबनान पर सैन्य रुख के चलते वे सीधे सरकार में शामिल नहीं होंगे।
इसके विपरीत, राम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने आइजनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में आधिकारिक रूप से शामिल होने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। अब्बास व्यावहारिक राजनीति और इजरायली अरब नागरिकों के दैनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के पक्षधर रहे हैं।
मुख्य दलों का रुख और अरब समुदाय की स्थिति
दूसरी ओर, इजरायल की राजनीति में इन पार्टियों की राह इतनी आसान नहीं दिखती है। आइजनकोट और नेतन्याहू दोनों के राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी अरब पार्टी के साथ गठबंधन या सीधी बातचीत से इनकार किया था। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने भी साफ कर दिया है कि वह सरकार बनाने के लिए किसी अरब दल से चर्चा नहीं करेगी।
बता दें कि इजरायल की कुल आबादी में करीब 20 प्रतिशत यानी लगभग 21 लाख नागरिक अरब समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। देश के स्वास्थ्य क्षेत्र जैसे कि डॉक्टर, नर्स और फार्मासिस्टों में इनकी हिस्सेदारी बेहद अहम है। हालांकि अरब पार्टियां ऐतिहासिक रूप से सरकारों को बाहर से समर्थन देती रही हैं, लेकिन 2021 में राम पार्टी के सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने से एक बड़ा बदलाव आया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी नतीजों के बाद अन्य राजनीतिक दल अपने रुख में नरमी लाते हैं या नहीं।





