रांची: झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की वर्षों पुरानी मांगों और सेवा संबंधी उलझनों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य कर्मियों की वेतन विसंगति, सेवा शर्तों में एकरूपता और सुनिश्चित वित्तीय उन्नयन योजना (ACP/MACP) के मामलों के स्थायी समाधान हेतु पूर्व में गठित सभी समितियों को विलोपित करते हुए एक नई उच्च स्तरीय समिति के पुनर्गठन को हरी झंडी दे दी गई है।
सरकार के इस फैसले से स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, अभियंत्रण और सचिवालय सेवा समेत विभिन्न संवर्गों के हजारों कर्मचारियों में उम्मीद की नई किरण जगी है।
वर्षों से लंबित वेतन और प्रोन्नति की विसंगतियों पर लगेगा विराम
राज्य के विभिन्न कर्मचारी संगठन और सेवा संघ लंबे समय से 7वें वेतन आयोग की लागू विसंगतियों, ग्रेड-पे में असमानता तथा समयबद्ध वित्तीय प्रोन्नति (ACP/MACP) के लाभ न मिलने को लेकर आंदोलनरत रहे हैं। कई विभागों में समान पद और समान दायित्व होने के बावजूद वेतनमान और सेवा नियमावली में भारी अंतर देखा जाता रहा है।
पहले से गठित समितियों द्वारा समय पर स्पष्ट रिपोर्ट न आने या प्रक्रियाओं के धीमे चलने के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा था। इसी गतिरोध को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार ने पुराने ढांचों को पूरी तरह समाप्त कर एक सशक्त और एकीकृत समिति के पुनर्गठन का निर्णय लिया है।
नई समिति के पास होंगे व्यापक अधिकार
पुनर्गठित उच्च स्तरीय समिति को यह जिम्मा सौंपा गया है कि वह विभिन्न संवर्गों की सेवा नियमावलियों का गहन अध्ययन करे और सेवा शर्तों में एकरूपता लाने के लिए राज्य सरकार को व्यावहारिक अनुशंसाएं सौंपे। समिति का मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर होगा:
- विभिन्न विभागों में चली आ रही वेतन असमानताओं की विसंगति को दूर करना।
- पात्रता पूरी करने वाले कर्मियों को बिना प्रशासनिक अड़चन के एसीपी/एमएसीपी का लाभ दिलाना।
- सभी सरकारी सेवाओं के लिए पारदर्शी और एक समान सेवा शर्तों की रूपरेखा तैयार करना।
कर्मचारियों के मनोबल और कार्यक्षमता में आएगा सुधार
वित्तीय लाभ और प्रोन्नति से जुड़े मामले केवल आर्थिक विषय नहीं होते, बल्कि वे कर्मचारियों के सम्मान, मनोबल और उनकी कार्यक्षमता से सीधे जुड़े होते हैं। नियत समय पर वित्तीय उन्नयन न मिलने से सेवा निवृत्त होने की कगार पर पहुंचे कर्मचारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था।
सचिवालय सूत्रों के अनुसार, पुनर्गठित समिति में प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया जाएगा, जो समयबद्ध तरीके से कर्मचारी संगठनों के प्रतिवेदनों पर सुनवाई कर अपनी रिपोर्ट कैबिनेट को सौंपेंगे। सरकार के इस कदम को राज्य में प्रशासनिक सुशासन और कर्मचारी कल्याण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।




