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संथाल परगना के पशुपालकों को बड़ी सौगात: गोड्डा में 51.49 करोड़ से स्थापित होगा अत्याधुनिक पशु आहार कारखाना

दूध उत्पादन और ग्रामीण आर्थिकी को मिलेगी नई रफ्तार, झारखंड मिल्क फेडरेशन गोड्डा में लगाएगा 50 MTPD क्षमता का नया कैटल फीड प्लांट

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रांची/गोड्डा: झारखंड में श्वेत क्रांति को नई धार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए हेमंत सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में संथाल परगना क्षेत्र के गोड्डा जिले में एक आधुनिक पशु आहार (कैटल फीड) कारखाना स्थापित करने के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 एवं 2027-28 के तहत स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 5149.00 लाख रुपये (51.49 करोड़ रुपये) निर्धारित की गई है।
परियोजना की त्वरित शुरुआत सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में ही 3000.00 लाख रुपये (30 करोड़ रुपये) के व्यय की वित्तीय स्वीकृति भी दे दी है। यह संयंत्र झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) के माध्यम से राज्य योजना अंतर्गत संचालित ‘दुग्ध संग्रहण, विधायन एवं विपणन योजना’ के तहत धरातल पर उतारा जाएगा।

50 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता से होगी शुरुआत

गोड्डा में स्थापित होने वाले इस नए पशु आहार कारखाने की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 50 मीट्रिक टन प्रतिदिन (50 MTPD) होगी। भविष्य में बढ़ती मांग और डेयरी क्षेत्र के विस्तार को ध्यान में रखते हुए इस प्लांट को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इसकी क्षमता को आसानी से बढ़ाकर दोगुना, यानी 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन (100 MTPD) तक विस्तारित किया जा सके।
वर्तमान में राज्य के डेयरी किसान उच्च गुणवत्ता वाले संतुलित पशु आहार की कमी या दूसरे राज्यों से आने वाले महंगे चारे पर निर्भरता की समस्या से जूझते रहे हैं। गोड्डा में स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री लगने से न केवल संथाल परगना, बल्कि आसपास के जिलों के किसानों को भी किफायती दरों पर पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित पशु आहार उपलब्ध हो सकेगा।

संथाल परगना में क्यों जरूरी था यह संयंत्र?

संथाल परगना प्रमंडल—जिसमें गोड्डा, देवघर, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा जिले शामिल हैं—पारंपरिक रूप से कृषि और पशुपालन पर निर्भर इलाका रहा है। हाल के वर्षों में झारखंड मिल्क फेडरेशन (मेधा डेयरी) के नेटवर्क विस्तार के चलते इस पूरे क्षेत्र में दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
पशुओं के लिए प्रोटीन, मिनरल और विटामिन युक्त संतुलित आहार दूध की गुणवत्ता और वसा (फैट) की मात्रा बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। स्थानीय स्तर पर कारखाना होने से परिवहन लागत घटेगी, जिससे पशुपालकों को रियायती दर पर दाना-चारा मिलेगा और उनकी दुग्ध उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। लागत कम होने और उत्पादन बढ़ने का सीधा असर पशुपालक परिवारों की शुद्ध आमदनी पर पड़ेगा।

स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिकी को मिलेगा बढ़ावा

51.49 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस संयंत्र के संचालन से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के सैकड़ों नए अवसर सृजित होंगे। कारखाने के तकनीकी संचालन, ढुलाई, पैकेजिंग और वितरण श्रृंखला में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, पशु आहार के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले कच्चे माल—जैसे मक्का, चोकर, खली आदि—की स्थानीय स्तर पर खरीद बढ़ने से क्षेत्र के सामान्य किसानों को भी अपनी उपज का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सकेगा।
सरकार का यह निर्णय राज्य को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। जब किसानों को अपनी ही धरती पर गुणवत्तापूर्ण पशु आहार और दूध की सुनिश्चित खरीद की सुविधा मिलेगी, तो पशुपालन एक घाटे के सौदे से निकलकर एक लाभकारी और संगठित स्वरोजगार के रूप में स्थापित होगा।
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