रांची: झारखंड के जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानदारों यानी राशन डीलरों के हित में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्यभर के राशन डीलरों को इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों (Electronic Weighing Machines) के वार्षिक सत्यापन एवं मुहरांकन (स्टैंपिंग) शुल्क से पूरी तरह मुक्त करने के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
इस व्यवस्था को औपचारिक एवं वैधानिक रूप देने के लिए सरकार ने ‘झारखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली-2011’ के नियम 17 (5) के ठीक बाद एक नया उप-नियम 17 (6) जोड़ने की स्वीकृति दी है। इस संशोधन के प्रभावी होने के बाद अब पीडीएस दुकानदारों को विधिक माप विज्ञान (नापतौल) विभाग को प्रतिवर्ष दी जाने वाली मुहरांकन फीस से स्थाई छुटकारा मिल जाएगा।
सालाना वित्तीय बोझ से मिलेगी मुक्ति
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाने और अनाज के वजन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के उद्देश्य से राशन दुकानों में ई-पॉस (e-PoS) मशीनों से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक वेइंग मशीनों का उपयोग अनिवार्य किया गया है। विधिक माप विज्ञान के मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी व्यापारिक तौल मशीन की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में एक बार विभागीय जांच, सत्यापन और सीलिंग (मुहरांकन) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। इसके एवज में दुकानदारों को निर्धारित सरकारी शुल्क का भुगतान करना पड़ता था।
डीलर एसोसिएशनों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि वे सरकार के कल्याणकारी खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत एक निश्चित कमीशन पर खाद्यान्न वितरण का कार्य करते हैं। ऐसे में मशीनों के नियमित सत्यापन का शुल्क उनके ऊपर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालता है। सरकार ने डीलरों की इस वास्तविक समस्या को संज्ञान में लेते हुए यह शुल्क माफ करने का मार्ग प्रशस्त किया।
पारदर्शिता और वितरण व्यवस्था होगी सुगम
राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और राज्य खाद्य योजना के तहत लाखों गरीब परिवारों को रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराया जाता है। मशीनों के नियमित मुहरांकन शुल्क से छूट मिलने के कारण अब डीलरों और नापतौल विभाग के बीच की प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं सुगम होंगी।
इस निर्णय का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव यह होगा कि कोई भी डीलर शुल्क से बचने के चक्कर में तौल मशीनों के सत्यापन में लापरवाही नहीं बरतेगा। समय पर और निःशुल्क जांच होने से इलेक्ट्रॉनिक कांटों की विश्वसनीयता बनी रहेगी, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा और उन्हें सही वजन में राशन की गारंटी सुनिश्चित होगी।
डीलर संगठनों में खुशी की लहर
कैबिनेट के इस संवेदनशील निर्णय का स्वागत करते हुए राज्यभर के फेयर प्राइस शॉप डीलरों ने राहत की सांस ली है। कर्मचारी और व्यापारी संगठनों का कहना है कि सरकार के इस कदम से जन वितरण प्रणाली के सुचारू संचालन में मदद मिलेगी और डीलरों का मनोबल बढ़ेगा। राशन वितरण के तकनीकी आधुनिकीकरण के दौर में यह फैसला सरकार और जमीनी स्तर पर सेवा दे रहे वितरकों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा।





