रांची: मानसिक स्वास्थ्य और संवेदनशीलता के क्षेत्र में देश भर में विशेष पहचान रखने वाले संस्थान रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड अलाइड साइंसेज (RINPAS), कांके में आज एक नई ऊर्जा और संकल्प की तस्वीर देखने को मिली। अवसर था ‘कायाकल्प–स्वच्छता एवं हाइजीन दिवस’ का, जिसके तहत भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेष अभियान-6 के दिशा-निर्देशों में एक वृहद स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। संस्थान का पूरा प्रांगण “स्वच्छ RINPAS, स्वस्थ RINPAS” के नारों और सकारात्मक संकल्पों से गूंज उठा।
आमतौर पर अस्पतालों की पहचान गंभीर माहौल, दवाइयों की महक और ओपीडी की कतारों से होती है, लेकिन मंगलवार को रिनपास का नजारा बदला हुआ था। यहां इलाज के साथ-साथ परिसर के प्राकृतिक और चिकित्सीय परिवेश को निर्मल बनाने की ललक हर चेहरे पर दिखी। संस्थान की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई और उप निदेशक मिथिलेश कुमार चौधरी के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों, वरिष्ठ चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सफाई कर्मियों ने कंधे से कंधा मिलाकर इस अभियान में हिस्सा लिया।कोने-कोने तक पहुंची सफाई की मुहिम
अभियान की शुरुआत रिनपास परिसर के सबसे संवेदनशील और जरूरी हिस्सों से की गई। मरीजों के परिजनों के ठहरने की जगह ‘धर्मशाला’, मानसिक स्वास्थ्य सुधार के बाद समाज में पुनर्वास के लिए स्थापित ‘महिला हाफवे होम’, आधुनिक शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र ‘टीचिंग ब्लॉक’ और ‘महिला अनुभाग’ सहित ओपीडी क्षेत्र में सघन सफाई अभियान चलाया गया। केवल कचरा हटाना ही लक्ष्य नहीं था, बल्कि संक्रमण मुक्त, व्यवस्थित और सकारात्मक वातावरण तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
स्वच्छता के ‘5 सरल नियम’ और जन-संवाद
अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजन अक्सर मानसिक तनाव से जूझ रहे होते हैं; ऐसे में उन्हें सरल और सहज तरीके से जागरूक करना सबसे कारगर साबित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्थान परिसर और ओपीडी ब्लॉक में आकर्षक बैनर तथा स्टैंडी लगाए गए। इनके माध्यम से आमजन को दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले 5 सरल नियम समझाए गए:
- हाथ नियमित धोएँ और संक्रमण की कड़ी तोड़ें।
- कचरा हमेशा नियत डस्टबिन में ही डालें।
- परिसर में इधर-उधर थूकने से बचें।
- शौचालय को उपयोग के बाद स्वच्छ रखें।
- स्वच्छ रिनपास की इस मुहिम को अपनी साझी जिम्मेदारी मानें।
सामूहिक भागीदारी की दिखी मिसाल
इस विशेष अभियान में मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के अलावा मनोरोग समाज कार्य विभाग (PSW) की विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा किरण, डॉ. रेखा रॉय, डॉ. इंदु सुलंकी, कुमार शैलाज प्रकाश, ए. के. पांडेय, डॉ. रविंद्र उरांव, डॉ. सुभाष सोरेन, डॉ. जय प्रकाश, डॉ. मसरूर जहां, डॉ. रमेश हेम्ब्रम, डॉ. भुवन ज्योति, अंकित सिन्हा और पवन सहित दर्जनों स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
संस्थान प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि रिनपास केवल दवाओं से ठीक करने वाली जगह नहीं है, बल्कि यह वह सुरक्षित आश्रय है जहां मरीज को मानवीय गरिमा और स्वास्थ्यवर्धक माहौल मिलता है। स्वच्छता कोई एक दिन की रस्म नहीं, बल्कि दैनिक आदत और सामूहिक संस्कृति का हिस्सा होनी चाहिए। जब डॉक्टर, स्टाफ और मरीज मिलकर एक स्वच्छ परिसर का निर्माण करेंगे, तभी स्वस्थ समाज की सच्ची नींव रखी जा सकेगी।

स्वच्छता के ‘5 सरल नियम’ और जन-संवाद
सामूहिक भागीदारी की दिखी मिसाल



