Riyadh: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज के बंद होने की आशंका के बीच सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर और तुर्किये की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन के साथ तेहरान का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और उनके सुरक्षा सलाहकारों से सीधी बातचीत कर यमन के हूती विद्रोहियों के साथ जारी संघर्ष को रोकना और क्षेत्रीय शांति के लिए रास्ता तलाशना था।
सऊदी अरब के आर्थिक हितों पर हूती हमलों का साया
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब के लिए यह युद्ध बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। सऊदी अरब ऐतिहासिक रूप से अमेरिका का सबसे बड़ा सुरक्षा साझेदार है, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में वह अपनी रिफाइनरियों और आर्थिक परियोजनाओं पर हूती हमलों का जोखिम नहीं उठा सकता। सऊदी अरब की कमाई का मुख्य जरिया तेल निर्यात है। होर्मुज में तनाव के कारण सऊदी अरब अपनी लाल सागर स्थित पाइपलाइनों के जरिए तेल भेजने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हूती विद्रोहियों ने उन पाइपलाइनों और रियाद के हवाई अड्डों को भी मिसाइलों और ड्रोनों से निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इससे प्रिंस सलमान के विजन 2030 के तहत चल रहे विदेशी निवेश और पर्यटन के सपनों को झटका लगा है।
तेहरान बैठक में युद्धविराम और आर्थिक प्रस्ताव पर चर्चा
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक तेहरान में हुई बातचीत में यमन में स्थायी युद्धविराम लागू करने के लिए वित्तीय और राजनीतिक शर्तों पर चर्चा की गई। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी अरब ने ईरान की मध्यस्थता के जरिए हूती-नियंत्रित क्षेत्रों के पुनर्गठन और वहां के कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए एक अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि सऊदी अधिकारियों ने इस वित्तीय सौदे की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यदि यह समझौता होता है, तो इसे ईरान की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जाएगा। ईरान ने सऊदी अरब को आश्वस्त किया है कि वह हूतियों को बातचीत की मेज पर लाने का प्रयास करेगा।





