फॉण्ट कनवर्टर NEW

विकास आयुक्त का कड़ा निर्देश: बिहार का पैसा यहीं के विकास में हो निवेश

विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में 100 अंकों के 'मापन सूचकांक' के आधार पर बैंकों की रैंकिंग जारी की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹4,95,000 करोड़ का वार्षिक साख लक्ष्य रखा गया है।

अपनी भाषा में पढ़ें

Patna: बैंकों की तिजोरियों में बिहार की जनता का पैसा जमा होता है, लेकिन जब कर्ज बांटने की बारी आती है तो बड़े-बड़े बैंक हाथ खींच लेते हैं…यह दर्द पुराना है। लेकिन इस बार विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने 100 अंकों का जो नया ‘मापन सूचकांक’ का हंटर चलाया है, उससे वित्तीय गलियारों में खलबली मच गई है। ग्रीन ज़ोन वाले पीठ थपथपा रहे हैं तो रेड ज़ोन में बैठे दिग्गजों (SBI और PNB जैसे बैंकों) के कान खड़े हो गए हैं। संदेश साफ है…अब सिर्फ जमा-पूंजी बटोरने से काम नहीं चलेगा, बिहार के विकास में पैसा लगाना ही होगा।

वित्तीय समावेशन, ऋण प्रवाह और बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा बिहार में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभाकक्ष में उच्च स्तरीय समिति की तृतीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के समग्र बैंकिंग प्रदर्शन, वार्षिक साख योजना (Annual Credit Plan) के लक्ष्यों की प्राप्ति, साख जमा अनुपात (CD Ratio) और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की बिंदुवार गहन समीक्षा की गई।

बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बिहार के इतिहास में पहली बार बैंकों के कार्य-प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए 100 अंकों के एक वैज्ञानिक ‘मापन सूचकांक’ (Performance Index) को लागू किया गया है, जिसके आधार पर बैंकों की स्पष्ट रैंकिंग तय की गई है।

₹4.95 लाख करोड़ का विशाल साख लक्ष्य और मजबूत प्रगति

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का आकार बढ़ाकर ₹4,95,000 करोड़ का विशाल लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो राज्य के करीब ₹1,25,000 करोड़ के प्लान बजट से लगभग चार गुना अधिक है। सितंबर तिमाही (30 सितंबर 2026 तक) तक राज्य ने इस लक्ष्य के विरुद्ध ₹1,89,343.52 करोड़ (38.25%) की मजबूत उपलब्धि हासिल कर ली है।

यह प्रगति पिछले वर्ष की इसी छमाही की तुलना में ₹46,228.29 करोड़ अधिक है। क्षेत्रवार प्रगति में एमएसएमई (MSME) क्षेत्र ने सर्वाधिक उत्साहजनक प्रदर्शन करते हुए ₹1,59,632 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले ₹84,091.21 करोड़ (52.68%) का ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया है। वहीं, कृषि क्षेत्र में ₹43,967.17 करोड़ (28.00%) का ऋण वितरित किया जा चुका है।

राज्य का समग्र CD Ratio 60.17 प्रतिशत पर बना हुआ है। 30 सितंबर 2026 तक कुल जमा राशि बढ़कर ₹6,49,225 करोड़ तथा कुल बकाया साख ₹3,90,655 करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के तहत ₹8,344.70 करोड़, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत ₹28,451.21 लाख और पीएम स्वनिधि योजना के तहत ₹2,09,959 लाख का ऋण वितरित किया जा चुका है।

100 अंकों के सूचकांक पर बैंकों की रैंकिंग: ग्रीन से लेकर रेड जोन तक

नए मापन सूचकांक के आधार पर बैंकों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:

– ग्रीन ज़ोन (उत्कृष्ट प्रदर्शन – 50 या अधिक अंक): इस सूची में IDFC फर्स्ट बैंक (74 अंक) शीर्ष पर है। इसके बाद जम्मू एंड कश्मीर बैंक (68), आरबीएल बैंक (68), एचडीएफसी बैंक (65), बैंक ऑफ बड़ौदा (64), उज्जिवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (63), पंजाब एंड सिंध बैंक (58), बिहार ग्रामीण बैंक (57), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (53), एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (53) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (52) शामिल हैं।

– येलो ज़ोन (मध्यम प्रदर्शन – 40 से 50 अंक): इस श्रेणी में आईसीआईसीआई बैंक (47), बैंक ऑफ इंडिया (47), पंजाब नेशनल बैंक (45), एक्सिस बैंक (42), यस बैंक (42), यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक (42) और इंडियन बैंक (40) आते हैं।

– रेड ज़ोन (कम प्रदर्शन – 40 से कम अंक): इस श्रेणी में इंडियन ओवरसीज बैंक (37), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (37), यूको बैंक (35), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (32), केनरा बैंक (27), आईडीबीआई बैंक (26), बंधन बैंक (26), कोटक महिंद्रा बैंक (26) और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (26) शामिल हैं।

“बिहार का पैसा बिहार के विकास में हो निवेश” – विकास आयुक्त

समीक्षा के दौरान विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने राज्य के औसत (38.25%) से कम प्रदर्शन करने वाले और रेड ज़ोन में शामिल प्रमुख बैंकों (जैसे SBI, PNB, CBI, BOI, UCO और IDBI) को कड़ी फटकार लगाते हुए मिशन मोड में काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन बड़े बैंकों के पास बिहार की भारी जमा पूंजी मौजूद है, उनका CD Ratio 50% से कम होना एक गंभीर विषय है। बैंकों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे ऋण आवेदनों की पेंडेंसी खत्म करें और केसीसी, पीएम विश्वकर्मा व रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की योजनाओं में लोन रिजेक्शन दर को न्यूनतम स्तर पर लाएं ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति को और गति मिल सके।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram