Spiritual Adda: करवाचौथ के नजदीक आते ही बाजारों में चहल-पहल बढ़ जाती है। सजे-धजे बाजारों में महिलाओं की भीड़ और हाथों में मेहंदी की खूशबू यह बता देती है कि यह त्योहार सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि सुहागिनों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है। 29 अक्टूबर को पडने वाले इस व्रत को लेकर महिलाओं में अभी से जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
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धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के आदर्श दांपत्य प्रेम और अटूट समर्पण का प्रतीक है। महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत का पालन करती हैं।
सुबह का स्नान, शुद्धि और सूर्य देव को अर्घ्य
करवाचौथ के दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और आत्मशुद्धि के साथ होती है। व्रती महिलाएं पवित्र जल या गंगाजल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की विशेष साफ-सफाई कर उसे दीप, धूप और ताजे फूलों से सजाया जाता है। दिन की शुरुआत में तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का औपचारिक संकल्प लिया जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि सूर्य देव की आराधना से जीवन में तेज और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
करवा, सिंदूर पूजन और व्रत कथा का श्रवण
शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मिट्टी या धातु के करवे में जल, हल्दी, गुड़ और अक्षत रखकर उसकी पूजा की जाती है। सुहाग के प्रतीक सिंदूर, रोली और मेहंदी का इस पूजन में विशेष महत्व होता है। इसके बाद सभी महिलाएं एकत्रित होकर करवाचौथ की पौराणिक कथा का श्रवण करती हैं, जिसमें शिव-पार्वती के समर्पण और पतिव्रता धर्म के महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है।
रात का चंद्र दर्शन, अर्घ्य और व्रत का पारण
दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद रात में चंद्रोदय का इंतजार किया जाता है। आकाश में चंद्रमा के दर्शन होने पर छलनी की ओट से चंद्र देव को देखा जाता है और जल व दूध से अर्घ्य समर्पित किया जाता है। इसके पश्चात छलनी से ही पति का मुख देखकर उनके दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की जाती है। पति द्वारा पत्नी को जल पिलाकर और मिष्ठान खिलाकर व्रत का विधिवत पारण कराया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस अनुष्ठान से दांपत्य जीवन में सामंजस्य, विश्वास और आपसी प्रेम सदैव बना रहता है।





