Patna: बिहार के गांवों में अब विकास सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि डामर और कंक्रीट की उन पक्की सड़कों पर साफ दौड़ता नजर आ रहा है जो गांवों को मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। ऑटो-टोटो के हार्न की आवाज और चेहरों पर दिखती राहत की यह मुस्कान चीख-चीखकर कह रही है कि गांवों की तस्वीर अब वाकई बदल चुकी है।
कभी कीचड़, गड्ढों और धूल-फांकते रास्तों की वजह से घंटों का सफर तय करने वाले ग्रामीण अब फर्राटा भर रहे हैं। आइए, जमीन पर उतर चुकी इस योजना का असर बयां करती हुई खुद ग्रामीणों की जुबानी जानते हैं कि कैसे इन पक्की सड़कों ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
मुहम्मद शहजाद की जुबानी: 25-30 मिनट का सफर अब चंद मिनटों में
क्वारी बुजुर्ग से मनाड़ रोड होकर धर्मपुर को जोड़ने वाली खस्ताहाल सड़क का दर्द बयां करते हुए वार्ड नंबर-4 के निवासी मोहम्मद शहजाद बताते हैं कि पहले इस रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं था। खराब सड़क के कारण धर्मपुर पहुंचने में ही 25 से 30 मिनट का वक्त लग जाता था और लोग इस रास्ते पर आने से कतराते थे।
लेकिन अब पक्की सड़क बन जाने से तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। शहजाद खुशी जताते हुए कहते हैं, “अब धर्मपुर पहुंचना बेहद आसान हो गया है। सड़क अच्छी होने की वजह से अब गांव में ऑटो और सवारी गाड़ियां भी आसानी से मिलने लगी हैं। लोग महज 20 से 30 रुपये खर्च कर आराम से सवारी गाड़ी से आ-जा रहे हैं। इस सड़क ने हम सबका जीवन बहुत आसान कर दिया है।”
राणा राजीव सिंह का अनुभव: आधे घंटे की जगह डेढ़ घंटा लेने वाले रास्ते अब हुए आसान
बिंदवारा के रहने वाले राणा राजीव सिंह बताते हैं कि इस सड़क के बन जाने से इलाके की पूरी जनता को अभूतपूर्व फायदा हुआ है। पहले की दिक्कतों को याद करते हुए वे कहते हैं:
हादसों में कमी: पहले रास्तों पर भारी पानी जमा रहता था और आए दिन दुर्घटनाएं होती थीं, जो अब काफी हद तक कम हो गई हैं।
समय की भारी बचत: पहले जहां मुख्यालय पहुंचने में आधे घंटे की जगह डेढ़-डेढ़ घंटा तक बर्बाद हो जाता था, वहीं अब लोग महज 45 से 50 मिनट में आराम से मुख्यालय पहुंच जाते हैं।
महासुंदरी देवी की खुशी: कीचड़ से मुक्ति और घर तक पहुंच रहे वाहन
ग्रामीण महिलाओं की राहत को बयां करते हुए महासुंदरी देवी कहती हैं कि पहले जरा सी बारिश में रोड पर पानी और कीचड़ भर जाता था, जिससे पैदल चलना भी मुहाल था।
वे आगे बताती हैं, “अब पक्की सड़क बन जाने से हमारे जीवन की सारी कठिनाइयां दूर हो गई हैं। अब हमारे दरवाजे तक दोपहिया वाहन, टोटो, टेंपो और तमाम सवारियां आसानी से पहुंच रही हैं। इस सड़क के बन जाने से हम सभी ग्रामीण महिलाओं को बहुत बड़ी सहूलियत मिल गई है।”
ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना का व्यापक असर
यह योजना सिर्फ आवागमन को सुगम ही नहीं बना रही, बल्कि गांवों के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है:
बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य: पक्की सड़कें बनने से आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस समय पर गांवों तक पहुंच रही हैं, और बच्चों का स्कूल आना-जाना भी सुरक्षित हुआ है।
आर्थिक उन्नति: किसानों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने और छोटे कारोबारियों को बाजार तक पहुंचने में आसानी हुई है।
सरकारी दावा: एक इंटरव्यू के दौरान उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा दावा करते हुए कहा था कि बिहार की ग्रामीण सड़कें आज देश में सबसे बेहतर हैं और पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड की तुलना में यहां की ग्रामीण सड़कों की स्थिति काफी शानदार है।




