Patna/Saharsa: सहरसा जिले के सरकारी स्कूलों की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। यहां के मॉडल स्कूलों में बच्चों को सिर्फ डॉक्टर या इंजीनियर बनने की ही शिक्षा नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें आधुनिक दौर की मांग के मुताबिक ‘कंटेंट क्रिएशन’ और वीडियो ब्लॉगिंग की बारिकियां भी सिखाई जा रही हैं। सरस्वती विद्यालय निकेतन और जिले के अन्य मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्र अब जेईई-नीट की तैयारी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी कला का जौहर भी दिखा रहे हैं। सहरसा के इन स्कूलों के छात्र व्लॉगिंग के जरिए अपने विद्यालय की खूबियों और वहां मिलने वाली सुविधाओं का खुद प्रमोशन कर रहे हैं।
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छात्रों ने वीडियो के जरिए दिखाई स्कूल की असल तस्वीर
सहरसा के जिला मॉडल स्कूल और पतरघाट स्थित रमा देवी हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं- बिंदेश कुमार, खुशी कुमारी और जाह्नवी कुमारी ने वीडियो ब्लॉगिंग के माध्यम से गजब का हुनर दिखाया है। इन बच्चों ने अपने वीडियो कंटेंट में स्कूल के मैथ्स लैब, कंप्यूटर लैब और बॉयोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली को बहुत ही करीने से दर्शाया है।
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वीडियो में बच्चों ने टीमवर्क का शानदार उदाहरण देते हुए शिक्षकों की पढ़ाने की शैली को बड़े ही रोचक अंदाज में समझाया है। सहपाठियों से बातचीत करते हुए उन्होंने दिखाया कि कैसे पीसीएम लैब के जरिए बच्चों को विषयों की गहराई से शिक्षा दी जा रही है। इसके अलावा, जिन बच्चों की रुचि कला और संस्कृति में है, उन्हें अनुभवी शिक्षकों द्वारा संगीत में भी पूरी तरह निपुण किया जा रहा है।
‘एक अफसर, एक विद्यालय’ पहल से बदली सूरत

इस बदलाव के पीछे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना काम कर रही है। वरिष्ठ उप समाहर्ता सिमरन कुमारी ने बताया कि बिहार सरकार के ‘सात निश्चय-3 उन्नत विकास-उन्नत शिक्षा’ अभियान के तहत हर अफसर को एक विद्यालय गोद लेने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत अधिकारी लगातार स्कूलों का निरीक्षण करते हैं ताकि ग्रामीण बच्चों को मिल रही सुविधाओं की निगरानी हो सके। यशस्वी मुख्यमंत्री का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है, ताकि वे अपनी प्रतिभा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के सामने ला सकें। इसके लिए स्कूलों में हर हफ्ते यूनिट टेस्ट और अभिभावकों के साथ विशेष संवाद का भी आयोजन किया जा रहा है।
डिजिटल मंच पर मिली ग्रामीण बच्चों को नई पहचान
इन स्कूलों के बच्चों ने विद्यासाथी ऐप के जरिए हो रही पढ़ाई का टेस्टिमोनियल भी अपने वीडियो में प्रस्तुत किया है। पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल और तकनीकी शिक्षा से जुड़कर सहरसा के ये ग्रामीण बच्चे अब अपनी प्रतिभा को सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के सामने लाने में कामयाब हो रहे हैं। इस अनोखी पहल से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और वे शिक्षा के साथ तकनीकी कौशल में भी आगे निकल रहे हैं।
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