Patna: बिहार में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग ने प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार किया है। इसके तहत हर महीने प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंगलवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती एवं प्रमाणीकरण कार्यशाला’ में इसकी जानकारी दी गई।
कार्यशाला में किसानों और विभागीय पदाधिकारियों को प्राकृतिक खेती और इसके प्रमाणीकरण से जुड़ी जानकारी दी गई। विभाग का कहना है कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
हर महीने होंगे जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की मांग है और आने वाले दिनों में इस पर और अधिक चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को यह जानकारी देना जरूरी है कि प्राकृतिक खेती क्यों जरूरी है और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करके इसे कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में उत्पादन कुछ कम हो सकता है, लेकिन बाजार में इसकी मांग अधिक है। ऐसे में कम लागत में किसानों को फसलों का बेहतर मूल्य मिल सकता है। इसके लिए बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
रसायनों के इस्तेमाल पर जताई चिंता
प्रधान सचिव ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इनके अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी और पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
उन्होंने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि वर्षा के पानी के साथ रसायनों के बहकर नदी-नालों में पहुंचने से प्रदूषण बढ़ता है।
प्राकृतिक खेती को लेकर बढ़ाई जाएगी जागरूकता
नर्मदेश्वर लाल ने कहा कि अब प्राकृतिक खेती की ओर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। विभाग का प्रयास अधिक से अधिक लोगों को इसके बारे में जागरूक करना है, ताकि प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि किसानों को अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिला स्तर पर भी होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
पीपीएम के निदेशक संतोष कुमार उत्तम ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यालय के अलावा जिला स्तर पर भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों से अधिकारियों और किसानों के बीच जागरूकता बढ़ेगी। उनके मुताबिक, जागरूकता बढ़ने के बाद प्राकृतिक खेती मिशन के रूप में चल रहे अभियान का व्यापक प्रभाव समाज में दिखाई दे सकता है।
प्रमाणीकरण और मार्केटिंग पर भी जोर
कार्यशाला में प्राकृतिक खेती के साथ उसके प्रमाणीकरण से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा की गई। विभाग की ओर से किसानों को प्राकृतिक खेती के फायदे और इससे जुड़े जरूरी पहलुओं की जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है।
विभाग का मानना है कि प्राकृतिक खेती के साथ बेहतर मार्केटिंग व्यवस्था विकसित होने से किसानों को अपनी उपज का उचित बाजार मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
कार्यशाला में अधिकारी और किसान रहे मौजूद
कार्यशाला में विभाग के विशेष सचिव डॉ. बीरेन्द्र प्रसाद यादव, अपर सचिव कल्पना कुमारी समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और किसान मौजूद रहे। विभाग की ओर से प्राकृतिक खेती को लेकर आगे भी नियमित जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।





