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IAS छोड़ते ही सियासत में दिव्या मित्तल, अब पार्टी बनाने की तैयारी?

Lucknow: पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक शुरुआत का आधार बताते हुए उन्होंने फिलहाल किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की बात नहीं कही है। हाल की

दिव्या मित्तल की सियासत में एंट्री

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Lucknow: पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफे के बाद राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक शुरुआत का आधार बताते हुए उन्होंने फिलहाल किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की बात नहीं कही है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, उनके किसी स्थापित दल में जाने के बजाय अपनी पार्टी बनाने पर विचार करने की चर्चा है।

दिव्या मित्तल की सियासी पारी शुरू

दिव्या मित्तल का इस्तीफा 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ था। इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर अटकलें लग रही थीं। 29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में आने की स्थिति साफ की। उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताते हुए यहीं से राजनीतिक सफर शुरू करने की बात कही।

दिव्या मित्तल के संभावित चुनाव क्षेत्र को लेकर मिर्जापुर का नाम पहले से चर्चा में है। कुछ रिपोर्टों में उनके मिर्जापुर से चुनाव लड़ने की संभावना का जिक्र किया गया है। हालांकि, अभी उन्होंने किसी सीट से चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।

रोहिणी घावरी भी यूपी में सक्रिय

दूसरी ओर, रोहिणी घावरी भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होती दिखाई दे रही हैं। स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। उनकी सक्रियता को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित और वाल्मीकि राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

रोहिणी घावरी ने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर पहले आरोप लगाए थे। हाल में उनकी ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात की खबर भी सामने आई, जिसके बाद उनके राजनीतिक सक्रिय होने की चर्चा और तेज हुई। हालांकि, उन्होंने अभी किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान नहीं किया है।

2027 में कई नए चेहरे मैदान में

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 403 सीटें हैं। ऐसे में नए राजनीतिक दलों और नए चेहरों की एंट्री चुनावी मैदान में अलग-अलग समीकरण बना सकती है। छोटी पार्टियों और नए राजनीतिक मोर्चों के उम्मीदवार कई सीटों पर वोटों के बंटवारे को प्रभावित कर सकते हैं।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत दूसरे दल भी 2027 की तैयारी में जुटे हैं। कांग्रेस की ओर से छोटे दलों को साथ लाने की रणनीति और नए नेताओं को जोड़ने की कोशिशों की चर्चा है। हालांकि, 2027 विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी निर्वाचन आयोग ने नहीं किया है।

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