Washington, (USA): रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय लैब कर्मचारी दर्या शिपिलोवा की मौत के बाद संभावित प्लेग संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है। शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को मौत हुई थी। रूस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर के अनुसार उनकी मौत अज्ञात कारण की निमोनिया से हुई और जांच में उनके काम से जुड़े किसी रोगजनक का सबूत नहीं मिला। हालांकि, संभावित न्यूमोनिक प्लेग की रिपोर्टों के बीच अमेरिका मामले की निगरानी कर रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह सीडीसी के साथ इरकुत्स्क की स्थिति पर नजर रख रहा है और रूस से मामले की सटीक जानकारी जल्द साझा करने का आग्रह किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि अधिकारी घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं।
लैब कर्मचारी की मौत से क्यों बढ़ी चिंता
प्लेग की पुष्टि अभी नहीं हुई
दर्या शिपिलोवा इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। उनकी मौत के बाद कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि प्रयोगशाला में काम करते समय प्लेग बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने के कारण वह संक्रमित हुई होंगी। लेकिन यह दावा अभी आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुआ है।
रोस्पोट्रेबनादजोर ने कहा है कि जांच में ऐसा कोई सूक्ष्मजीव नहीं मिला जो उनके पेशेवर काम से जुड़ा हो और संस्थान में किसी खतरनाक रोगजनक से जुड़ी घटना की पुष्टि भी नहीं हुई है।
करीब 200 लोग निगरानी में
एहतियात के तौर पर शिपिलोवा के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। जिस अस्पताल में उनकी मौत हुई, वहां भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अब तक संपर्क में आए लोगों में प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ संपर्कों में कोविड-19 और राइनोवायरस जैसे अन्य संक्रमण पाए गए हैं, लेकिन इन्हें प्लेग संक्रमण का प्रमाण नहीं माना गया है।
टेस्ट ट्यूब टूटने की रिपोर्ट की पुष्टि नहीं
शिपिलोवा के संक्रमित होने की संभावित वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में प्रयोगशाला में टेस्ट ट्यूब टूटने की बात कही गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में उनके काम से जुड़े यात्रा के दौरान संक्रमण की संभावना का उल्लेख किया गया है। रूसी अधिकारियों ने अभी इनमें से किसी दावे की पुष्टि नहीं की है।
मध्य एशिया के देशों ने बढ़ाई निगरानी
संभावित संक्रमण को लेकर मध्य एशिया के कुछ देशों ने भी एहतियाती कदम उठाए हैं। किर्गिस्तान ने रूस से आने वाले यात्रियों, वाहनों और सामान की जांच के लिए सीमा पर सैनिटरी-क्वारंटीन नियंत्रण बढ़ाया है। कजाकिस्तान ने भी इरकुत्स्क की स्थिति की निगरानी और सीमा पर स्वास्थ्य जांच जारी रखी है। कजाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने संक्रमण के आयात का जोखिम फिलहाल कम बताया है।
प्लेग कितना खतरनाक है?
प्लेग Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रामक रोग है। इसके अलग-अलग रूप होते हैं, जिनमें न्यूमोनिक प्लेग गंभीर रूप है। यह संक्रमित व्यक्ति के श्वसन कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। हालांकि, समय पर पहचान और एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर प्लेग का इलाज संभव है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे रूस में प्लेग महामारी कहना जल्दबाजी होगी। रूस ने संक्रमण की पुष्टि नहीं की है और विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार इस घटना से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम फिलहाल कम माना गया है। जांच और संपर्कों की निगरानी जारी है।





